दुर्लभ संताली दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सहेज रहीं डॉ. राही सोरेन, 131 सामग्रियों की हुई खोज

जमशेदपुर : संताली भाषा, साहित्य और इतिहास से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए डॉ. राही सोरेन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय से जुड़ी डॉ. राही सोरेन पुराने दस्तावेजों, पांडुलिपियों, पत्र-पत्रिकाओं और अन्य ऐतिहासिक स्रोतों को खोजकर उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित करने की दिशा में काम कर रही हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां मूल दस्तावेजों के माध्यम से अपने इतिहास को समझ सकें।


वर्ष 2021 में डॉ. राही सोरेन के नेतृत्व में British Library Endangered Archives Programme (EAP1300) परियोजना शुरू हुई, जिसमें उन्होंने Principal Investigator के रूप में काम किया। परियोजना के तहत पूर्वी भारत में वर्ष 1890 से 1975 के बीच प्रकाशित शुरुआती संताली पत्र-पत्रिकाओं और दुर्लभ साहित्य की खोज और संरक्षण किया गया। मार्च 2022 तक 131 दुर्लभ सामग्रियां खोजी गयीं और उनकी 1,793 उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल तस्वीरें तैयार की गयीं। इन दस्तावेजों में संताली समाज के सामाजिक जीवन, लोकगीतों, लोककथाओं, भाषा और उस दौर में हुए बदलावों से जुड़ी जानकारियां दर्ज हैं।
डॉ. राही सोरेन का शोध 1855 के संताल हूल और इसमें संताल महिलाओं की भूमिका पर भी केंद्रित है। वह इतिहास में कम चर्चा में आयी महिलाओं के योगदान और त्याग को सामने लाने पर काम कर रही हैं। वर्ष 2024 में कोलकाता में दुर्लभ संताली दस्तावेजों और संताल हूल से संबंधित सामग्रियों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गयी, जहां युवाओं, छात्रों और समुदाय के लोगों को पुराने संताली पत्र-पत्रिकाओं, ऐतिहासिक पत्रों और चित्रों को देखने का अवसर मिला।


