166 सृजन संवाद में वंदना राग के ‘सरकफंदा’ पर चर्चा

जमशेदपुर : 26 सितंबर 2026 को जमशेदपुर की साहित्य, कला और सिनेमा पर आधारित, ‘सृजन संवाद’ की 166वीं मासिक गोष्ठी का स्ट्रीमयार्ड ऑनलाइन आयोजन किया गया जिसके फ़ेसबुक लाइव। संध्या 7:00 बजे से सृजन संवाद की गोष्ठी का ऑनलाइन प्रसारण सरिता यार्ड और सृजन संवाद फेसबुक लाइव से साहित्य-सिने दर्शक जुड़े। कार्यक्रम की शुरुआत सिने-साहित्य विशेषज्ञ डॉ. विजय शर्मा जी ने मुख्य अतिथि वंदना राग के साथ-साथ सबका हार्दिक स्वागत किया। इसके पश्चात डॉ० प्रियंका सिंह ने वंदना राग का परिचय दिया, उन्होंने बताया, पिता के स्थानान्तरण के कारण इंदौर में जन्मी वंदना राग का बचपन कई शहरों में बीता। इन्होंने एम. फिल तक शिक्षा पाई और साहित्य कथा लेखन 13 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया। उनकी पहली कहानी ‘हंस’ पत्रिका में छपी। पहला कहानी संग्रह ‘यूटोपिया’ नाम से आया। ‘विसात पर जुगनू’ पहला उपन्यास है, दूसरे उपन्यास ‘सरकफंदा’ पर आज की चर्चा आयोजित है। उन्हें कई सम्मान प्राप्त हैं, शिक्षण क्षेत्र में भी वे इअही हैं।


संवादी वैभव मणि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए वंदना राग ने बताया ‘सरकफंदा’ उपन्यास सिर्फ ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है, हालाँकि इतिहास पीछे छाया की तरह चलता रहा है। आधुनिक समय में सिर्फ अतीत ही नहीं बल्कि हमें वर्तमान समय को सजगता से देखना है। उपन्यास स्त्री विद्रोही चेतना और विस्थापन के दर्द को व्यक्त करता है। नायिका बिट्टो विद्रोही तेवर वाली युवती है। आज के युवा बात-बात पर असहिष्णु हो जाते हैं, आधुनिक समय में नई पीढ़ी के बीच बढ़नी भावनात्मक संवेदनहीनता को उपन्यास में सजग पात्रों द्वारा दर्शाने का प्रयास किया गया है। वंदना राग की पालतू बिल्ली इसमें ‘लाइब्रेरियन बिल्ला’ नाम का पात्र है, उपन्यास में लेखिका के बुकशेल्फ पर बैठा रहता है। लेखिका ने उपन्यास के पात्रों की रचना अपने माहौल से प्रेरणा ली कर की है, जिसमें वो खुद भी शामिल है। उपन्यास अतीत-वर्तमान में आवाजाही करता हुआ पीढ़ियों के विचारों के अंतराल को सामने लाता है।
संवादी वैभव मणि त्रिपाठी ने वंदना राग से बातचीत के क्रम में उत्कृष्ट प्रश्न पूछे जिनसे उपन्यास की तार्किक विशेषताओं, पृष्ठभूमि के साथ पात्रों की जानकारी मिली, उसकी कई गिरहें खुलीं। वक्ता ने श्रोताओं के प्रश्नों उत्तर विस्तार से दिया। पूरा कार्यक्रम शीघ्र सृजन संवद यूट्यूब पर उपलब्ध होगा।
कार्यक्रम के अंत की ओर डॉ. प्रियांका सिंह ने मुख्य बातों को समटते हुए सबको धन्यवाद दिया। मुख्य वक्ता ने सृजन संवाद में आमंत्रित हो अपनी बात कहने की प्रसन्नता व्यक्त की, उन्होंने सबको धन्यवाद दिया। डॉ. विजय शर्मा के अगले माह सिनेमा पर कार्यक्रम की घोषणा के साथ सभा विसर्जित हुई। कार्यक्रम में साहित्य-कला फ़ाउंडेशन की मुख्य ट्रस्टी डॉ. क्षमा त्रिपाठी, अर्चना अनुपम कर्ण, आभा विश्वकर्मा, गीता दूबे, जमशेदपुर से जुड़े। पुणे से सिने-इतिहासकार-विशेषज्ञ मनमोहन चड्ढ़ा, बंग्लोर से पत्रकार अनघा मारीषा, गोरखपुर से अनुराग रंजन, अवतरण जरनल, अजय पाण्डेय आदि ने ऑनलाइन सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।


