विश्व रेडियो दिवस पर खास: जमशेदपुर के ‘रेडियोमैन’ का अनोखा संग्रहालय, 992 रेडियो आज भी चालू

0
Advertisements
Advertisements
Advertisements

जमशेदपुर : 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इस खास मौके पर शहर के कदमा उलियान निवासी चिन्मय महतो चर्चा में हैं, जिन्हें लोग ‘रेडियोमैन’ के नाम से जानते हैं।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

उन्होंने अपने घर को ही रेडियो और ट्रांजिस्टर के अनोखे संग्रहालय में बदल दिया है। यहां 1960 के दशक से लेकर आज तक के कुल 992 रेडियो और ट्रांजिस्टर सुरक्षित रखे गए हैं।

अलमारियों में सजे सैकड़ों रेडियो हर दौर की कहानी सुनाते हैं। संग्रह में देशी और विदेशी कंपनियों के रेडियो शामिल हैं। मर्फी, बुश, फिलिप्स और अकाई जैसी कंपनियों के मॉडल यहां आज भी सहेजकर रखे गए हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकतर रेडियो अभी भी चालू हालत में हैं।

चिन्मय महतो का रेडियो प्रेम 1962 में शुरू हुआ था। उनके पिता, जो भारतीय वायुसेना में थे, युद्ध से लौटते समय उनके लिए एक छोटा ट्रांजिस्टर लाए थे। वही पहला रेडियो उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया।

उस एक ट्रांजिस्टर से शुरू हुआ सफर आज एक मिनी रेडियो म्यूजियम तक पहुंच चुका है। करीब 60 वर्षों से वे लगातार रेडियो सुनते और संग्रह करते आ रहे हैं।

वे बताते हैं कि रेडियो उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन का साथी है। उन्होंने देश-विदेश के रेडियो स्टेशनों को हजारों पोस्टकार्ड और चिट्ठियां भेजी हैं। आज भी यह सिलसिला जारी है।

उनके संग्रहालय में वॉयस ऑफ जर्मनी, वॉयस ऑफ अमेरिका, रेडियो रोमानिया और रेडियो बेलारूस जैसे विदेशी स्टेशनों से आए पत्र और पोस्टर भी सुरक्षित हैं।

चिन्मय महतो याद करते हैं कि एक समय झुमरी तिलैया से प्रसारित फरमाइशी गीत सुनना श्रोताओं के लिए गर्व की बात होती थी। रेडियो के जरिए खबरें, संगीत और खेल की जानकारी घर-घर पहुंचती थी।

See also  पूर्व भाजपा प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले के बड़े भाई सरदार त्रिलोचन सिंह का निधन

आज भले ही मोबाइल और इंटरनेट का दौर हो, लेकिन उन्होंने रेडियो की विरासत को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखा है।

About The Author

Thanks for your Feedback!

You may have missed