ऑटिज्म जागरूकता पर खास पहल, बच्चों के बेहतर विकास पर दिया गया फोकस


जमशेदपुर : विश्व ऑटिज्म जागरूकता माह के अवसर पर तारापोर स्कूल में “Understanding is the First Step to Inclusion” विषय पर विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के विकास में शिक्षा और अभिभावक मार्गदर्शन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था, ताकि बच्चों की क्षमता को सही दिशा में विकसित किया जा सके।

कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों के एक पैनल ने अभिभावकों को ऑटिज्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. खुशबू तिवारी ने ऑक्यूपेशनल थेरेपी के महत्व को समझाते हुए बताया कि इससे बच्चों को संवेदनात्मक और शारीरिक चुनौतियों से उबरने में मदद मिलती है। वहीं डॉ. जानकी वेंकटेश और डॉ. प्रीतपाल ने अभिभावकों को घर के माहौल को सकारात्मक बनाने और बच्चों की कमजोरियों के बजाय उनकी क्षमताओं पर ध्यान देने की सलाह दी।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक विकास में अभिभावकों का व्यवहार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धैर्य, समझ और सहानुभूति के साथ बच्चों का मार्गदर्शन करने से उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आता है।
विद्यालय की प्राचार्या ईशिता डे ने कहा कि हर बच्चा अलग होता है और उसे समझना ही समावेशी शिक्षा की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि स्कूल का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके। इस कार्यक्रम ने समावेशी शिक्षा और न्यूरोडायवर्सिटी को बढ़ावा देने की दिशा में स्कूल की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।


