झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण, राष्ट्रपति भवन में मिला देश का सम्मान

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता ने ग्रहण किया। समारोह में गांडेय विधायक कल्पना सोरेन सहित परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। इस अवसर पर 65 हस्तियों को विभिन्न पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

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शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को वर्तमान रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने आदिवासी अधिकारों और शोषण के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना। युवावस्था में उन्होंने संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज जैसे संगठनों का गठन कर आदिवासी हितों की आवाज बुलंद की। उनके आंदोलनों ने झारखंड क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता को नई दिशा दी।

वर्ष 1973 में शिबू सोरेन ने विनोद बिहारी महतो और अन्य साथियों के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की। अलग झारखंड राज्य की मांग को जनआंदोलन बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे तथा झारखंड की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली व्यक्तित्व बने रहे। लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को दिल्ली में उनका निधन हो गया था, जिसके बाद उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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