नॉर्थ-साउथ बहस के बीच बड़ा आंकड़ा, 93% छात्रों ने चुनी हिंदी


नई दिल्ली : देश में हिंदी को लेकर चल रही नॉर्थ बनाम साउथ बहस के बीच एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। कर्नाटक बोर्ड के करीब 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को चुना है। आंकड़ों के अनुसार कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा का चयन किया, जिनमें से लगभग 7.5 लाख विद्यार्थियों ने हिंदी को प्राथमिकता दी।

नई शिक्षा नीति के तहत लागू त्रिभाषा फार्मूले में छात्रों को अंग्रेजी के साथ एक स्थानीय भाषा और एक अन्य भाषा चुनने का विकल्प मिलता है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा हिंदी चुनना इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है। हालांकि कोंकणी, मराठी, उर्दू और अरबी जैसी भाषाएं भी कुछ छात्रों ने तीसरे विकल्प के रूप में चुनी हैं।
हिंदी को लेकर राजनीतिक स्तर पर बहस लगातार जारी है। कुछ नेताओं ने इसे थोपने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर यह आंकड़े संकेत देते हैं कि कई राज्यों में छात्र स्वेच्छा से हिंदी सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। त्रिभाषा नीति का उद्देश्य भी भाषाई संतुलन बनाए रखना और सभी भाषाओं को समान महत्व देना है।


