जमशेदपुर में आदिवासी समुदाय ने कर दिया पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम का बहिष्कार, प्रशासन पर आरोप

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जमशेदपुर : जमशेदपुर के प्रखंड विकास कार्यालय के सामने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और एक चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। यह प्रशिक्षण ‘पॉजिटिव मंत्रा काउंसलिंग प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम प्रधानों को दिया जा रहा था, जिसे आदिवासी समुदाय ने स्वीकार नहीं किया।

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विरोध के नेतृत्व में धाड़ दिशोम देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू और अन्य पारंपरिक अगुवा आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और पंचायती राज विस्तार अधिनियम (PESA) के नियमों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि अभी तक पारंपरिक ग्राम सभाओं का सीमांकन या सत्यापन प्रशासन की ओर से नहीं किया गया है। इस अधूरी प्रक्रिया के बीच निजी संस्था द्वारा प्रशिक्षण आयोजित करना गलत और सरकारी धन की बर्बादी है, कहा गया।

प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि प्रशासन ने इस प्रशिक्षण की जानकारी क्षेत्र के पारंपरिक अगुवाओं को उचित रूप से नहीं दी। विरोध का एक कारण यह भी रहा कि यह कार्यक्रम 11 फरवरी को आयोजित किया गया, जो सामुदायिक रूप से वीर शहीद बाबा तिलका मांझी की जन्म जयंती के रूप में मनाए जाने वाले दिन के साथ जुड़ा है, और इसे अपमानजनक माना गया।

प्रदर्शनकारी समाज ने मांग की कि पेसा के अंतर्गत कानून का सम्मान करते हुए पारंपरिक अगुवाओं को उनके अधिकार वापस दिए जाएं और गैर-आदिवासी ग्राम प्रधानों को हटाया जाए। विरोध में बड़ा समूह मौजूद था, जिसमें सेन बसु हांसदा, बिरसिंह बास्के, बिपिन चंद्र मुर्मू, बिंदे सोरेन और मोहन मंडी जैसे प्रतिनिधि शामिल थे।

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प्रदर्शन के दौरान जमशेदपुर बीडीओ को भी ज्ञापन सौंपा गया तथा कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। इस मुद्दे को अब उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए कागजी शिकायत भी तैयार की जाएगी।

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