आदित्यपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कंडेम्ड बिल्डिंग पर कब्जे का खेल जारी, जर्जर भवन में अवैध बिजली कनेक्शन से कट रही जिंदगी..

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आदित्यपुर: आदित्यपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित कंडेम्ड घोषित बिल्डिंग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे है। विभागीय अभिलेखों में परित्यक्त और उपयोग के लिए अनुपयुक्त घोषित किए जा चुके इन जर्जर भवनों में आज भी लोगों के रहने की बात सामने आ रही है। हैरत की बात यह है कि खस्ताहाल भवनों में न केवल लोगों का बसेरा बना हुआ है, बल्कि वहां अवैध रूप से बिजली उपयोग किए जाने की भी सूचना हैं।

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स्थानीय सूत्रों के अनुसार वर्षों पुराने ये भवन समय के साथ पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। भवनों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, छतें कमजोर हो गई हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। सुरक्षा कारणों से इन्हें कंडेम्ड घोषित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर छुटभैया नेताओं के बहकावे में आ कर कुछ लोगों ने इन पर कब्जा जमा रखा है।

चर्चा यह भी है कि कुछ स्थानीय छुटभैया नेताओं के संरक्षण के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। आरोप है कि सरकारी संपत्ति पर कब्जा कर रहने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। यही वजह है कि कंडेम्ड भवनों में भी गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं।

मामले का सबसे गंभीर पहलू अवैध बिजली कनेक्शन का है। सूत्र बताते हैं कि क्वार्टरों में बिना वैध अनुमति के बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि बिजली चोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी गंभीर विषय बन जाएगा।

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स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भवन को विभाग खुद असुरक्षित मान चुका है, वहां लोगों का रहना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। इसके बावजूद यदि अतिक्रमण जारी है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर कंडेम्ड घोषित क्वार्टरों में लोगों का रहना किसकी अनुमति से जारी है? अवैध बिजली कनेक्शन किसके संरक्षण में संचालित हो रहे हैं? और सरकारी संपत्ति पर कब्जा हटाने के लिए संबंधित विभाग कब कार्रवाई करेगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरे इलाके को है।

मिली जानकारी के मुताबिक आदित्यपुर थाना वाले रोड में सब्जी बेचने वाले लोग भी इन्हीं नेताओं के बहकावे में आ कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना स्टॉक और कचड़ा भी रखने का काम करते हैं। कई बार इस वजह से मरीज को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है।

सूत्र बताते है कि इसका अतिक्रमण करने वाले लोग भी स्वास्थ्य विभाग में ही कार्यरत है।

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