1780 करोड़ के GST मामले में टाटा स्टील को बड़ी जीत, सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस किया रद्द



नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील लिमिटेड के खिलाफ वित्त वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 से जुड़े जीएसटी मामले में जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया है। मामला करीब 1,780 करोड़ रुपये की मांग से जुड़ा था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि सीजीएसटी एक्ट की धारा 74 के तहत पांच साल की विस्तारित समय सीमा केवल ‘फ्रॉड’, ‘जानबूझकर गलत बयान’ या ‘तथ्यों को छिपाने’ जैसे शब्द लिख देने से लागू नहीं की जा सकती। इसके लिए नोटिस में ऐसे आरोपों के समर्थन में ठोस आधारभूत तथ्य स्पष्ट रूप से दर्ज होना जरूरी है।


मामला नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ऑडिट आपत्तियों के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट में कथित अंतर और 2019-20 में टैक्स के कथित कम भुगतान से जुड़ा था। विभाग ने 13 जून 2025 को नोटिस जारी किया था। टाटा स्टील का तर्क था कि सामान्य स्थिति में लागू धारा 73 की तीन साल की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी और धारा 74 लगाने का पर्याप्त आधार नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील की अपील स्वीकार करते हुए नोटिस रद्द कर दिया, हालांकि विभाग को कानून के तहत अनुमति होने पर 28 फरवरी 2027 से पहले जरूरी आधारभूत तथ्यों के साथ नई कार्रवाई शुरू करने की स्वतंत्रता दी है।


