सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज पर जताई चिंता, राज्यों को दी नसीहत CJI सूर्यकांत ने कहा — “मुफ्त योजनाओं की बजाय रोजगार को तरजीह दें”

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नई दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में फ्रीबीज यानी चुनावी “मुफ्त योजनाओं” के बढ़ते चलन पर कड़ी टिप्प्णी की है। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा मुफ्त चीजें बांटना गंभीर विषय है और इसे विचार करने की आवश्यकता है।

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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि आजकल कई राज्य मुफ्त राशन, बिजली, साइकिल, और सीधे कैश जैसी योजनाओं को लागू कर रहे हैं। CJI ने सवाल उठाया कि ऐसी योजनाओं का खर्च आखिर कौन उठाता है अगर केवल करदाता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुफ्त योजनाएं अगर असंतुलित रूप से बढ़ें, तो विकास के लिए जरूरी फंड कम पड़ सकता है और राजस्व का बड़ा हिस्सा मुफ्त योजनाओं पर खर्च हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक कल्याण योजनाओं को मुफ्त देना संवैधानिक दायित्व के दायरे में आता है, लेकिन राज्य को मुफ्त योजनाओं की बजाए रोजगार और विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि एक वर्ष में जुटाए गए राजस्व को विकास और बुनियादी ढांचे में प्राथमिकता के साथ खर्च किया जाना चाहिए। यह मामला अब तीन जजों की पीठ के सामने भी सुना जा सकता है, ताकि मुफ्त योजनाओं के भविष्य के दिशा-निर्देशों पर निर्णय लिया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के इस बयान के साथ यह मुद्दा फिर से उभरा है कि फ्रीबीज के बढ़ते चलन से लोकतंत्र और आर्थिक संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त योजनाएं अगर ठीक से लक्षित न हों, तो वे आर्थिक बोझ बढ़ा सकती हैं और रोजगार सृजन की दिशा में बाधा डाल सकती हैं।

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