तलाक मांगने पहुंचे पति को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, “शांति से बैठो, 15 हजार देते रहो”


नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में तलाक की मांग को लेकर पहुंचे एक पति को सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी का सामना करना पड़ा। पति की ओर से दलील दी गई कि वह पिछले 16 साल से अलग रह रहा है और हर महीने 15 हजार रुपये गुजारा भत्ता भी दे रहा है, इसलिए उसे तलाक दे दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल इन आधारों पर तलाक नहीं दिया जा सकता।

सुनवाई के दौरान जज ने पति को स्पष्ट तौर पर कहा कि वह शांति से बैठे और तय गुजारा भत्ता देता रहे। कोर्ट ने संकेत दिया कि वैवाहिक विवादों में सिर्फ अलग रहना या भत्ता देना ही तलाक का पर्याप्त आधार नहीं होता, बल्कि अन्य कानूनी पहलुओं को भी देखा जाता है.
अदालत की इस टिप्पणी को वैवाहिक मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह साफ किया गया कि तलाक के लिए तय कानूनी मानकों का पालन जरूरी है और केवल व्यक्तिगत दलीलों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।


