गुलाब की खेती में रोजगार की बड़ी संभावना, रोजाना बिकते हैं करीब 1,300 फूल


रांची : झारखंड में व्यावसायिक फूलों की खेती की संभावनाओं के बीच गुलाब किसानों और युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है। रांची की जलवायु, ऊंचाई और मिट्टी को गुलाब की खेती के अनुकूल बताया गया है। यहां लंबे समय से देसी और विदेशी किस्मों के गुलाब उगाए जाते हैं। लोकभवन के उद्यान में 150 से अधिक किस्मों के गुलाब मौजूद हैं। गुलाब का उपयोग कट फ्लावर, गुलदस्ते और नर्सरी के अलावा गुलाब जल तथा अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों में भी किया जा सकता है। इसके लिए खेती को वैज्ञानिक तकनीक, बाजार और प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने की जरूरत बताई गई है।

फूल विक्रेताओं के अनुसार, सामान्य दिनों में रांची में रोजाना लगभग 1,300 गुलाब की बिक्री होती है। त्योहार और लगन के दौरान मांग बढ़कर प्रतिदिन 8,000 से 10,000 तक पहुंच जाती है, जिससे एक ही दिन में लाखों रुपये का कारोबार होता है। वर्तमान में एक गुलाब 30 रुपये में बिक रहा है। मांग अधिक होने के बावजूद झारखंड में गुलाब की खेती सीमित होने के कारण अधिकांश फूल पुणे से मंगाए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक खेती बढ़ने से नर्सरी, परिवहन और सजावट समेत पूरी वैल्यू चेन में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
रांची में गुलाब के प्रति रुचि पुरानी है और लोग घरों की छतों पर भी 50-60 किस्मों के गुलाब उगा रहे हैं। वर्ष 1984 में विज्ञान कांग्रेस के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रांची आई थीं। उस समय उन्होंने लोकभवन की गुलाब प्रदर्शनी देखकर यहां मौजूद गुलाबों की विविधता और सुंदरता की सराहना की थी। कृषि अध्ययनों के अनुसार, सर्दी का मौसम बेहतर गुणवत्ता और चटख रंगों वाले गुलाब के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।


