चाँद की दौड़ तेज, अमेरिका‑चीन के बीच अब ‘अंतरिक्ष सत्तात्मक’ संघर्ष

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वाशिंगटन/बीजिंग : अमेरिका और चीन के बीच चाँद पर नियंत्रण और नेतृत्व को लेकर प्रतिद्वंद्विता अब एक नई ऊँचाई पर पहुंच गई है। नासा ने अपने ‘Artemis’ कार्यक्रम के तहत चाँद पर स्थायी आधार (Moon Base) बनाने का 20 बिलियन डॉलर का रोडमैप तैयार किया है, जिसमें वह ऍर्टेमिस मिशनों के ज़रिये धीरे‑धीरे बुनियादी ढांचा तैयार करेगा। इस पहल के तहत चाँद की सतह पर इंसानों के रहने और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये सुविधाएँ विकसित करने की योजना शामिल है।

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अमेरिका ने अपने चाँदी के मार्ग को सुदृढ़ करने के लिये कक्षा में स्थापित ‘लूनर गेटवे’ परियोजना को रद्द कर दिया है और सीधे चाँद की जमीन पर बेस बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस बदलाव का उद्देश्य चीन को पीछे छोड़ते हुए 2030 के दशक की शुरुआत में चाँद पर अमेरिकी प्रभुत्व को स्थापित करना बताया जा रहा है।

बीच में, चीन भी अपने ‘चाँद के अभियान’ को तेज़ कर रहा है और 2030 के आसपास चाँद पर अपने पहले मानवीय मिशन तथा संभावित अनुसंधान और आधार योजनाओं पर काम कर रहा है। यही उल्लेखनीय गति अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों महाशक्तियों के बीच एक तकनीकी और रणनीतिक सत्तात्मक प्रतिस्पर्धा को जन्म दे रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जो देश चाँद पर मजबूत उपस्थिति स्थापित करेगा, वह भविष्य में न केवल वैज्ञानिक बल्कि रणनीतिक नेतृत्व में भी बड़ा लाभ प्राप्त कर सकता है। इस दौड़ को सिर्फ विज्ञान नहीं बल्कि वैश्विक रणनीति और ऊर्जा संसाधनों की संभावित पहुँच की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

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