झारखंड में इंटरमीडिएट शिक्षा संकट: छात्रों ने किया डीसी कार्यालय का घेराव, सरकार से की तीन सूत्रीय मांग

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झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों से 12वीं की पढ़ाई को स्थानांतरित करने और 11वीं के नामांकन पर रोक के फैसले के विरोध में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। इंटरमीडिएट बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

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जमशेदपुर सहित जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस आंदोलन में शामिल हुए। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व रिकी बांसियार, शुभम झा और अमन सिंह ने किया।

छात्र प्रतिनिधि शुभम झा ने कहा कि राज्य सरकार बिना किसी समुचित तैयारी के शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर रही है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। 12 जून को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को अंगीभूत महाविद्यालयों से 12वीं की कक्षाओं को स्थानांतरित करने का निर्देश जारी किया था। लेकिन अब तक जिला शिक्षा विभाग की ओर से कॉलेजों को कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला है।

छात्रों व अभिभावकों में भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है और कॉलेजों में पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि यह निर्णय नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के नाम पर छात्रों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश है। छात्र अब अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो चुके हैं।

प्रदर्शनकारियों की तीन मुख्य मांगें:

  1. 12वीं सत्र (2024-26) की पढ़ाई अंगीभूत महाविद्यालयों में ही जारी रखी जाए।
  2. जब तक अपग्रेडेड प्लस टू स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था नहीं होती, तब तक ग्यारहवीं में नामांकन अंगीभूत महाविद्यालयों में लिया जाए।
  3. इंटरमीडिएट स्तर पर पढ़ा रहे शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के रोजगार को सुनिश्चित किया जाए।
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प्रदर्शन में पायल रानी मंडल, सबिता सोरेन, बबीता सोरेन, पूजा, दीपा गोराई, बीपीनता आचार्य, राखी, सीता, रोशनी, सचिन, अनुज, जयंत, अपूर्व महतो सहित कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

छात्रों ने राज्य के अन्य जिलों के छात्रों से भी इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की है ताकि कम शुल्क में मिलने वाली इंटरमीडिएट शिक्षा को बचाया जा सके।

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