‘मैं देख नहीं सकता, लेकिन दुनिया को आईना दिखा सकता हूं’, PhD होल्डर्स के आंदोलन में नेत्रहीन विद्यानंद बने संघर्ष की आवाज

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पटना : पटना में शनिवार को PhD होल्डर्स के लोकभवन मार्च के दौरान नालंदा के नेत्रहीन PhD धारक विद्यानंद पासवान ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आर ब्लॉक चौराहे पर जुटे और प्रोफेसर नियुक्ति में UGC नियम लागू करने, उम्र सीमा बढ़ाने तथा प्रस्तावित नए नियमों का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसी भीड़ में अपने साथियों के सहारे आगे बढ़ रहे विद्यानंद ने कहा, “मैं देख नहीं सकता, लेकिन दुनिया को आईना दिखा सकता हूं।” उन्होंने बताया कि उन्होंने ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई की और वर्ष 2024 में पटना विश्वविद्यालय से PhD पूरी की।

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प्रदर्शन में अलग-अलग तरीके से अपनी मांगें रखने वाले कई लोग शामिल हुए। कुछ प्रदर्शनकारी राज्यपाल को देने के लिए गुलाब लेकर पहुंचे, जबकि 19 दिनों से अनशन कर रहे कुमुद पटेल व्हीलचेयर पर आंदोलन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आर ब्लॉक चौराहे पर डबल लेयर बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और कुछ ने आगे बढ़ने की कोशिश की। इससे मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही।

प्रदर्शनकारी PhD होल्डर्स का कहना है कि प्रोफेसर नियुक्ति में UGC के नियमों का पालन किया जाए और उम्र सीमा में राहत दी जाए। उनका आरोप है कि प्रस्तावित नए प्रावधानों से उनके लिए अवसर सीमित हो सकते हैं। विद्यानंद ने भी आंदोलन को लेकर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो वे संघर्ष जारी रखेंगे। उनके भावनात्मक और तीखे बयान ने प्रदर्शन में मौजूद लोगों को प्रभावित किया।

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विद्यानंद की कहानी इस आंदोलन में प्रतीकात्मक रूप से उभरकर सामने आई। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा पूरी कर PhD हासिल की और अब रोजगार तथा नियुक्ति से जुड़े अधिकारों की मांग को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उनका कहना है कि शारीरिक सीमाएं उनके संघर्ष और भविष्य के सपनों को रोक नहीं सकतीं। आंदोलन में उनकी मौजूदगी ने PhD होल्डर्स की मांगों को एक मानवीय और भावनात्मक चेहरा दे दिया है।

 

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