गंडक का जलस्तर तेजी से घटा, कथित लापरवाही पर 7 इंजीनियर निलंबित

बिहार : गंडक नदी में फ्लैश फ्लड के बाद जलस्तर तेजी से घट रहा है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक सारण के रेवाघाट में नदी अपने उच्चतम स्तर से 177 सेमी नीचे आ गई है और अब खतरे के निशान से 50 सेमी नीचे बह रही है। यहां स्थिति सामान्य हो गई है। वैशाली के लालगंज में भी जलस्तर 130 सेमी घटा है, हालांकि नदी अभी खतरे के निशान से 52 सेमी ऊपर है। विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में लालगंज में भी गंडक के खतरे के निशान से नीचे जाने की संभावना है। विभाग ने बताया कि नेपाल और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के कारण गंडक में अभूतपूर्व जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट में जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार कर गया, जबकि बिहार के बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया। इस दौरान कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए।


बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य में कथित लापरवाही के मामले में जल संसाधन विभाग ने 8 अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की है। इनमें कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, मो. साजिद इकबाल, सहायक अभियंता सुनील कुमार, विनोद कुमार, मो. जावेद अंसारी, कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार और विकास कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं, मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है। विभागीय आकलन में कुछ स्थानीय अभियंताओं पर आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई नहीं करने, ब्रीच वाले स्थानों पर कट-एंड बचाने के लिए मटेरियल और मैनपावर लगाने के बजाय मौके से हटने, स्थानीय संसाधन समय पर नहीं जुटाने, मटेरियल मैनेजमेंट में लापरवाही तथा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से बेहतर समन्वय नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं।
जल संसाधन विभाग के अनुसार फिलहाल तटबंधों पर दबाव नहीं है और सीपेज या पाइपिंग की समस्या भी नहीं है। ब्रीच वाले स्थानों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल जमा किया जा रहा है और कट-एंड को सुरक्षित करने के साथ टैगिंग का काम भी जारी है। मुख्यालय पटना के अलावा दूसरे जिलों से संसाधन भेजे गए हैं और अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती की गई है। विभाग तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ के बाद की स्थिति पर नजर रख रहा है।


