बगीचों से बाजार तक: नेतरहाट की वादियों में नाशपाती लिख रही तरक्की की नई कहानी

0
Advertisements
Advertisements
Advertisements

महुआडांड़: महुआडांड़ झारखंड के हिल स्टेशन नेतरहाट के नाशपाती बागान रैयती लोगों की आय का साधन तो हैं ही, साथ ही फल तोड़ने, छंटाई, पैकिंग और ढुलाई जैसे कामों में स्थानीय पुरुषों और महिलाओं को भी यहां मौसमी रोजगार मिलता है। बेहतर बाजार, भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विकास से यह क्षेत्र बागवानी आधारित स्थायी आर्थिक मॉडल बन सकता है।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

नेतरहाट: धुंध और नाशपाती की पहचान

झारखंड के लातेहार जिले का नेतरहाट पठारी क्षेत्र अपनी धुंध भरी वादियों, मनमोहक सूर्योदय व सूर्यास्त, घने जंगलों, शांत वातावरण और सुहावने मौसम के लिए जाना जाता है। इस हिल स्टेशन की पहचान नाशपाती के बागान भी हैं। ये बागान हरियाली के सुंदर नजारों के साथ आदिम जनजातीय समुदायों की आजीविका और बदलती अर्थव्यवस्था की जीवंत कहानी भी सुनाते हैं। कृषि विभाग का डंकन बागान यहां 85 एकड़ में फैला हुआ है। कई स्थानीय लोग भी अपने नाशपाती के बगीचे खुद संभालते हैं।

जलवायु देती है वरदान

एक हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई, ठंडी और संतुलित जलवायु, पर्याप्त वर्षा और जल निकासी वाली मिट्टी नेतरहाट को ऐसा प्राकृतिक परिवेश प्रदान करते हैं, जो नाशपाती जैसे समशीतोष्ण फलों के लिए आदर्श है। यहां की नाशपाती अपने आकार और मिठास से स्थानीय बाजारों में अलग पहचान बनाती है। बागानों में कतारों में खड़े पेड़ बसंत में सफेद फूलों की चादर ओढ़ लेते हैं और गर्मियों की दस्तक के साथ सुनहरी-हरी नाशपातियों से लद जाते हैं।

बागानों का इतिहास

औपनिवेशिक काल में यहां की अनुकूल जलवायु देखकर इन बागानों की नींव पड़ी और बाद के प्रशासनिक प्रयासों ने इन्हें विस्तार दिया। संस्थागत प्रयास, स्थानीय सहभागिता और प्रकृति की अनुकूलता ने मिलकर इस बागवानी को इसके मौजूदा स्वरूप तक पहुंचाया।अधिकतर बड़े बागान आज भी सरकारी विभागों या संस्थागत प्रबंधन के हाथों में हैं। हालांकि, कुछ पेड़ स्थानीय लोगों के अपने भी हैं।

See also  ब्रेन मलेरिया का कहर, बच्चे की मौत से इलाके में मचा हड़कंप

रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा

ये बागान रैयती लोगों की आय का साधन हैं। साथ ही फल तोड़ने, छंटाई, पैकिंग और ढुलाई जैसे कामों में स्थानीय पुरुषों और महिलाओं को मौसमी रोजगार भी देते हैं। यह भागीदारी केवल श्रम तक नहीं रुकती, बल्कि बागवानी के कौशल और अनुभव के रूप में एक अनौपचारिक प्रशिक्षण भी यहां चलता रहता है। नाशपाती के बागान पर्यटन की दृष्टि से भी नेतरहाट को नई पहचान देते हैं। फूलों से लदे या फलों से भरे पेड़ पर्यटकों को खींच लाते हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों, गाइडों और वाहन चालकों की आर्थिक गतिविधियां भी गति पकड़ती हैं।

महिलाएं बनीं बागानों की ताकत

नेतरहाट का सामाजिक ताना-बाना लंबे समय तक सीमित आजीविका, मुख्यधारा से कटाव और मौसमी पलायन से प्रभावित रहा है। पुरुषों के काम की तलाश में बाहर जाने से घर, बच्चों और दैनिक जीवन की सारी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ जाती थी। ऐसे में नाशपाती के बागानों ने महिलाओं को घर के पास ही आय और कौशल से जोड़ा। महिलाएं इन बागानों की असली ताकत हैं। फल पकने के मौसम में बागानों में महिलाओं की उपस्थिति सबसे अधिक दिखती है। नाशपाती तोड़ने से छंटाई और ग्रेडिंग तक हर काम में वे सक्रिय रहती हैं। महिलाएं अनौपचारिक समूह बनाकर मिलकर काम करती हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और आपसी सहयोग मजबूत होता है। यह आय भले ही बड़ी न हो, लेकिन अपने श्रम का प्रत्यक्ष फल पाने की यह अनुभूति महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति दोनों को मजबूत कर रही है। बागानों में काम करते हुए वे फसल प्रबंधन, गुणवत्ता पहचान और बाजार की समझ भी विकसित करती हैं।

See also  ATM में मदद के बहाने 1 लाख की ठगी, महिला के साथ बड़ी धोखाधड़ी

आगे की राह: मौसमी से स्थायी अर्थव्यवस्था की ओर

इस बागवानी से जुड़ी आय मुख्यतः मौसमी है, फिर भी यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की दिशा में बड़ी शुरुआत है। यहां पारंपरिक कृषि और वनोपज के साथ बागवानी भी नए विकल्प के रूप में उभर रही है। बाजार और अवसंरचना की चुनौतियां तो हैं, लेकिन यहां की नाशपाती की पहचान बढ़ने के साथ ही परिवहन, भंडारण और विपणन तंत्र भी मजबूत होगा।स्थानीय संग्रह केंद्र, छोटे कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयां इस बागवानी को लाभकारी बना सकती हैं। यहां सरकार और कुछ गैर-सरकारी संस्थाएं किसानों को प्रशिक्षण व बेहतर किस्में उपलब्ध करा रही हैं और उन्हें बाजार से जोड़ रही हैं। समुदायों की भागीदारी और कौशल विकास को और मजबूत करें, तो नेतरहाट एक समावेशी और स्थायी आर्थिक मॉडल की ओर बढ़ सकता है।

About The Author

Thanks for your Feedback!

You may have missed