चांडिल में अमृत भारत स्टेशन और फ्लाईओवर के बीच दलमा इको सेंसिटिव जोन का पेंच, हाथी कॉरिडोर और ESZ नियमों पर उठे सवाल

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Saraikela (संजीव मेहता) :दक्षिण पूर्वी रेलवे के आंद्रा प्रमंडल के चांडिल जंक्शन स्टेशन पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री व सांसद संजय सेठ द्वारा चांडिल रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत हाईटेक बनाने की घोषणा की गई है, जिसे स्थानीय लोगों ने खूब सराहा है. साथ ही नेशनल हाईवे पर बनने वाले फ्लाईओवर तथा पितकी गेट और चांडिल गोलचक्कर स्थित फ्लाईओवर के संबंध में वन विभाग और दलमा इको सेंसिटिव जोन से NOC मिलने की खबर भी मिल रही है. परंतु इन विकास योजनाओं के बीच लोग दलमा इको सेंसिटिव जोन के नाम पर चांडिल रेलवे स्टेशन से सटे NH-32 पर स्थित मकानों से संबंधित अधिसूचना को भूल गए. कुछ महीने पहले जारी वह अधिसूचना स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई थी. उसमें ESZ के दायरे में आने वाले निर्माणों को हटाने/रेगुलेट करने की चेतावनी दी गई थी. सवाल यह है कि दलमा इको सेंसिटिव जोन के नाम पर समय-समय पर ऐसी अधिसूचना जारी कर चेतावनी क्यों दी जाती है ? पर्यावरण मंत्रालय की 2012 की अधिसूचना के अनुसार दलमा वन्यजीव अभयारण्य के 10 किमी के दायरे को ESZ घोषित किया गया है. इसमें चांडिल का बड़ा हिस्सा आता है. ESZ में नई कॉलोनी, उद्योग, खनन व बड़े व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित हैं. पुराने निर्माणों को भी रेगुलेट किया जाना है.

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* हाथी कॉरिडोर बाधित होने से बढ़ी परेशानी-

दलमा वन्य प्राणी विशेषज्ञों की मानें तो चांडिल स्टेशन के पास से गुजरने वाला NH-32 का यह इलाका पारंपरिक हाथी कॉरिडोर के रूप में चिन्हित है. पिछले सालों में दो-तीन बार हाथियों के दल ने इसी रास्ते से दलमा की ओर जाने का प्रयास किया था. लेकिन चांडिल रेलवे स्टेशन पर रेक में लगातार कोयले का परिचालन, स्टेशन की चहारदीवारी, बढ़ता शोर और हाईवे पर ट्रैफिक के कारण यह कॉरिडोर अब बाधित हो गया है. कॉरिडोर बाधित होने के कारण अब हाथियों का दल अक्सर NH-33 बाईपास की तरफ निकल जाता है. इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं. पिछले साल NH-33 पर हाथियों के झुंड से टकराकर 2 लोगों की मौत हुई थी. वन विभाग का मानना है कि अगर पारंपरिक रास्ता साफ हो तो हाथी आबादी में नहीं घुसेंगे.

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* रेलवे यार्ड में कोयला परिचालन और ESZ नियमों पर उठे सवाल-

अब जब अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन का विस्तार, नए फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कें बनेंगी, तो ESZ नियम फिर आड़े आएंगे. एक तरफ विकास जरूरी है, दूसरी तरफ हाथी कॉरिडोर बचाना भी. वन विभाग ESZ का हवाला देकर निर्माण पर आपत्ति जता सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहले स्पष्ट करे कि ESZ में कौन से निर्माण मान्य हैं और कौन से नहीं. पुराने बसे लोगों को बेवजह परेशान न किया जाए. साथ ही हाथी कॉरिडोर को बचाने के लिए अंडरपास या एलिवेटेड रोड जैसे विकल्पों पर काम हो, ताकि विकास और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रहें. फिलहाल रेलवे और NHAI ने कहा है कि सभी प्रोजेक्ट वन एवं पर्यावरण विभाग की NOC लेकर ही किए जाएंगे.

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