सृजन संवाद की 161वीं गोष्ठी में घुमक्कड़ों के अनुभव, साहित्य और यात्रा पर गहरी चर्चा


जमशेदपुर : सृजन संवाद की 161वीं गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया, जिसका प्रसारण स्ट्रीमयार्ड और फेसबुक लाइव के जरिए हुआ। कार्यक्रम में साहित्य और कला जगत से जुड़े अनेक लोगों ने भाग लिया। सत्र का संचालन वैभव मणि त्रिपाठी ने किया, जबकि शुरुआत में डॉ. विजय शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। डॉ. प्रियंका सिंह ने वक्ताओं का परिचय देते हुए बताया कि वरिष्ठ साहित्यकार और घुमक्कड़ सतीश जायसवाल, साहित्यकार महेश कटारे और युवा लेखक-सह-ट्रैवलर संजय शेफर्ड इस चर्चा के मुख्य वक्ता रहे।

सत्र के दौरान सतीश जायसवाल ने अपने यात्रा अनुभव साझा करते हुए बताया कि पूर्वोत्तर भारत की यात्रा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने म्यांमार सीमा के पास मैनार नदी में सूर्यास्त का दृश्य देखते हुए अपनी चर्चित पुस्तक ‘सूर्य का जलावतरण’ का नामकरण किया। इस पुस्तक को लिखने में उन्हें करीब दस वर्ष लगे। वहीं महेश कटारे ने बताया कि वे लेखन के लिए यात्राएं करते हैं और ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव के सुझाव पर उन्होंने चंबल की यात्रा कर ‘काली धार’ उपन्यास लिखा। उन्होंने अपनी अन्य कृतियों और यात्राओं, जैसे ‘देस बिदेस दरवेश’ और ‘पहियों पर रात-दिन’, का भी उल्लेख किया।
युवा वक्ता संजय शेफर्ड ने बताया कि उन्होंने यात्रा के जुनून में अपनी नौकरी तक छोड़ दी और अब घूमने के साथ-साथ लेखन करते हैं। उन्होंने कहा कि घुमक्कड़ व्यक्ति वर्तमान में जीता है और लगातार नई जगहों की खोज में रहता है। कार्यक्रम में साहित्यकारों की यात्राओं और अनुभवों के जरिए साहित्य और जीवन के संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे श्रोता भी काफी प्रभावित हुए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय शर्मा ने सभी वक्ताओं, संचालक वैभव मणि त्रिपाठी, डॉ. प्रियंका सिंह, तकनीकी टीम और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी में देश-विदेश से कई श्रोता जुड़े, जिनमें जमशेदपुर, गोरखपुर, बैंगलोर, पुणे और जौनपुर सहित विभिन्न स्थानों के साहित्य प्रेमी शामिल रहे।


