केरल और यूपी में SIR पर रार, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

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नई दिल्ली:केरल में प्रस्तावित विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी.  राज्य सरकार ने याचिका में मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनावों के समाप्त होने तक एसआईआर को स्थगित किया जाए. राज्य सरकार के साथ ही, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है. दोनों याचिकाओं में मुख्य तर्क यही है कि एसआईआर और स्थानीय निकाय चुनावों का एक साथ होना प्रशासनिक रूप से असंभव है और इससे मतदाताओं के अधिकारों का हनन होगा.

केरल सरकार की याचिका आर्टिकल 32 के तहत दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि राज्य में 1,200 स्थानीय स्वशासन संस्थाएं (एलएसजीआई) हैं, जिनमें 941 ग्राम पंचायतें, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिकाएं और 6 निगम शामिल हैं. इनके कुल 23,612 वार्डों के लिए चुनाव दो चरणों में 9 और 11 दिसंबर को होने हैं, जबकि गिनती 13 दिसंबर को होगी.शीर्ष अदालत पहले ही पूरे भारत में SIR कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही है। उसने गत 11 नवंबर को द्रमुक, माकपा, पश्चिम बंगाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर आयोग से अलग-अलग जवाब मांगे थे। इन याचिकाओं में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के एसआईआर को चुनौती दी गई थी।

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दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों का SIR आदिवासियों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने की सुनियोजित साजिश है। पार्टी के आदिवासी विभाग के प्रमुख विक्रांत भूरिया ने यह भी कहा कि आदिवासियों के लिए एक प्रवासन नीति बननी चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में सिविल जज परीक्षा-2022 के परिणाम को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक भी आदिवासी का चयन नहीं किया गया, जो आरक्षण खत्म करने का एक तरीका है।

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