मिडिल ईस्ट संकट पर बिना नाम लिए पीएम मोदी ने ईरान, इजरायल और अमेरिका को दे दिया मैसेज

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Delhi : लोकसभा में पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट में गहराते संकट पर अमेरिका, इजरायल और ईरान का नाम लिए बिना साफ संदेश दिया. उन्होंने होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्गों की सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक स्थिरता पर भारत का स्पष्ट रुख रखा.करीब 24 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक संकट और आंतरिक हालात पर बात की. पीएम मोदी ने इस दौरान कहा- मेरी सरकार इस संकट में सतर्क है. उन्होंने इस दौरान आर्थिक संकट को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में भी देश को बताया. प्रधानमंत्री ने संबोधन के आखिर में अमेरिका से लेकर ईरान तक को भारत का संदेश भी दिया. पीएम ने साफ लहजे में कहा कि शांति के लिए कूटनीति जरूरी है. युद्ध दुनिया में कोई समाधान नहीं है.अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका को 2 संदेश दिया है. पहला, तेल खरीदी को लेकर और दूसरा शांति समझौते को लेकर. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- जिन देशों के पास तेल उपलब्ध है, हम उन देशों से अपने स्तर पर बात कर रहे हैं. उसके साथ तेल खरीदी को डील कर रहे हैं. दरअसल, कुछ दिन पहले अमेरिका ने एक बयान में रूस से तेल खरीदी को लेकर 30 दिन की छूट देने की घोषणा की थी.युद्ध को लेकर भी पीएम मोदी ने अमेरिका को संदेश दिया. पीएम मोदी ने कहा- भारत का स्टैंड शांति को लेकर है. कूटनीतिक तरीके से समाधान निकालने की जरूरत है. शांति समझौते के जरिए तनाव खत्म करना ही सबसे बेहतर विकल्प है.प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट स्वीकार नहीं है। दरअसल, यही रास्ता दुनिया के तेल और व्यापार के लिए बेहद अहम है। भारत ने कूटनीतिक तरीके से अपने जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की है, लेकिन समुद्र में हमलों को लेकर सरकार चिंतित है।पीएम मोदी ने यह भी बताया कि उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं से लगातार बातचीत की है। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत इन देशों के साथ मजबूती से खड़ा है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए व्यापार और ऊर्जा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए वहां शांति बनाए रखना जरूरी है।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह सतर्क है। तेल की कीमतों और वैश्विक संकट के असर को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकार कोशिश कर रही है कि आम जनता पर इसका बोझ कम से कम पड़े।

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