तुर्कमान गेट हिंसा मामले में 30 उपद्रवियों की हुई पहचान,


दिल्ली: पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास पुलिस पर हुए हमले मामले में 30 लोगों की पहचान कर ली गई है. फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन के दौरान शांति भंग करने की कोशिश की गई और सैकड़ों लोगों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया.हिंसा शुरू होने से पहले मौके पर मौजूद थे सांसद मोहिबुल्लाह नदवी.पुलिस अधिकारियों ने बताया कि समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को जांच में शामिल होने के लिए जल्द ही समन भेजा जाएगा, क्योंकि आरोप है कि हिंसा शुरू होने से पहले वह घटनास्थल पर मौजूद थे. दिल्ली पुलिस के अनुसार, सीनियर अधिकारियों ने सांसद से घटनास्थल से दूर रहने का अनुरोध किया था, लेकिन घटना से पहले वह उस इलाके के पास ही रहे. आरोपियों की पहचान करने के लिए कई पुलिस टीमें बनाई गई हैं, और पहचाने गए लोगों को हिरासत में लेने के लिए छापेमारी की जा रही है.एफआईआर की कॉपी में घटनाओं का पूरा क्रम दर्ज है, जिसमें अतिक्रमण वाली जमीन पर पुलिस की बैरिकेडिंग से लेकर एक दर्जन स्थानीय लोगों द्वारा भड़काऊ नारे लगाने और फिर पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने तक की बातें शामिल हैं. पुलिसकर्मी स्थानीय लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि यह तोड़फोड़ अभियान सिर्फ अवैध निर्माणों और अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीन को खाली कराने तक सीमित है और पास की मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होगा. एफआईआर के अनुसार, करीब 12:40 बजे जब पुलिसकर्मियों ने इलाके में बैरिकेडिंग शुरू की, ठीक उसी समय 30-35 लोगों का एक समूह मौके पर एकत्र हो गया और नारे लगाने लगा तथा पुलिस को नाकाबंदी करने से रोकने लगा.उपद्रवी तत्वों से कहा गया कि वे मौके पर इकट्ठा न हों क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 (जो उपद्रव या संभावित खतरे के मामलों में लागू होती है) लागू थी और उन्हें जल्दी से तितर-बितर हो जाना चाहिए, लेकिन भीड़ नरम पड़ने के बजाय और ज्यादा आक्रामक हो गई. भीड़ ने नारेबाजी तेज कर दी और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया.पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने और भीड़ द्वारा बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिससे ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर सीधे हमले को लेकर नेटिजन्स के एक वर्ग में गुस्सा देखा गया. एफआईआर में कहा गया कि एक प्रदर्शनकारी ने लाउडस्पीकर छीन लिया और उसे तोड़ दिया. उन्होंने न सिर्फ ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को रोका और उन पर हमला किया, बल्कि लाउडस्पीकर-बैरिकेड्स भी तोड़े और पुलिसकर्मियों पर पत्थरों से हमला किया. इस हमले में एसएचओ सहित कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए और बाद में उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया




