नक्सल विरोधी अभियान में 22 नक्सली मारे गए, 45 से अधिक ने किया आत्मसमर्पण

रांची : झारखंड में वर्ष 2026 के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 22 नक्सलियों के मारे जाने और 45 से अधिक के आत्मसमर्पण की जानकारी सामने आई है। जनवरी 2026 में पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल समेत 15 नक्सलियों को मार गिराया। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण सारंडा लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। अनल के मारे जाने को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में चतरा-हजारीबाग सीमा पर खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए अभियान में 15 लाख रुपये के इनामी सहदेव महतो समेत चार नक्सली मारे गए।

अप्रैल में ही सारंडा के बलिबा क्षेत्र में माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस मुठभेड़ में तीन नक्सली मारे गए, जबकि कोबरा बटालियन के चार जवान घायल हुए। मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहा है। मई 2026 में रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में 27 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें 25 सीपीआई-माओवादी और दो जेजेएमपी से जुड़े विद्रोही शामिल बताए गए। इसे झारखंड गठन के बाद का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण बताया गया। आत्मसमर्पण करने वालों में कई नक्सलियों के मिसिर बेसरा के नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई।
जुलाई 2026 में रांची पुलिस मुख्यालय में 16 अन्य शीर्ष माओवादियों ने भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण किया। इसके बाद अगस्त में पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा में 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली सलूका कायम समेत चार नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इन घटनाओं को नक्सल संगठनों पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में मुठभेड़ों के दौरान कुल 22 नक्सली मारे गए। वहीं, अलग-अलग अभियानों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से नक्सल नेटवर्क पर दबाव बढ़ने का आकलन किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा अभियानों के साथ पुनर्वास, स्थानीय लोगों का विश्वास और विकास योजनाओं की पहुंच को भी महत्वपूर्ण माना गया है।


