विश्वविद्यालय-महाविद्यालय कर्मचारियों के लिए 12 मांगें उठीं, तीन वर्ष से अधिक सेवा वालों के लिए स्थायी नियुक्ति की मांग

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JHARKHAND: आज दिनांक 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता के माध्यम से झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री, श्री विश्वम्भर यादव तथा झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री , श्री बीरेंद्र यादव ने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय की घोषणा की।

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झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अनुरोध पत्रांक संख्या-047, दिनांक 10.09.2026 के आलोक में, झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पत्रांक संख्या-61, दिनांक 21.09.2026 के माध्यम से झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ को विधिवत सम्बद्धता प्रदान की गई है। इस सम्बद्धता के साथ अब राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा-संबंधी समस्याओं एवं न्यायसंगत मांगों को व्यापक राज्यस्तरीय कर्मचारी मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा।

दोनों महासंघों के महामंत्रियों ने संयुक्त रूप से कहा कि झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ पहले से ही राज्य के विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष करता रहा है। अब विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के जुड़ने के बाद विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रश्न भी इसी व्यापक कर्मचारी आंदोलन का अभिन्न हिस्सा होंगे ।

दोनों महासंघों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि नियमसम्मत प्रशासन, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, उचित मानव संसाधन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक सेवा-शर्तों एवं कर्मचारियों के वैधानिक तथा न्यायसंगत अधिकारों के लिए होगा ।

इस अवसर पर महासंघ के महामंत्री श्री विश्वम्भर यादव ने राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कर्मचारियों से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं प्रमुख मांगों को उठाते हुए मीडिया बंधुओं को इससे अवगत कराया।

गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या और नियमित नियुक्ति का अभाव

राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कमी लंबे समय से गंभीर समस्या बनी हुई है। नियमित नियुक्तियों के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण संस्थानों में प्रशासनिक, तकनीकी, कार्यालयीय, पुस्तकालय, परीक्षा, लेखा, कम्प्यूटर, डाटा प्रबंधन, प्रयोगशाला एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए संविदा एवं आउटसोर्सिंग पर निर्भरता बढ़ती गई है।

महासंघ का मानना है कि स्थायी प्रकृति के नियमित कार्यों को लंबे समय तक अस्थायी मानव संसाधन के माध्यम से संचालित करना न तो कर्मचारियों के हित में है और न ही विश्वविद्यालयों की दीर्घकालिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उचित है।

अतः राज्य सरकार को आवश्यक स्वीकृत पदों की समीक्षा कर नियमित गैर-शिक्षकेत्तर नियुक्ति प्रक्रिया प्रारम्भ करनी चाहिए।

ACP/MACP एवं पदोन्नति के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन

महासंघ ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे पात्र नियमित गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए ACP/MACP उनकी कैरियर प्रगति का महत्वपूर्ण विषय है। राज्य के अधिकांश विश्वविद्यालयों में पात्र कर्मचारियों को ACP/MACP का लाभ दिए जाने के बाद अब कोल्हान विश्वविद्यालय एवं जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में लंबित ACP/MACP मामलों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन किया जाना आवश्यक है।

अतः संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन लंबित मामलों की समीक्षा कर पात्र कर्मचारियों को ACP/MACP का लाभ प्रदान करे तथा पात्र नियमित कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण करे।

राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पुनर्संरचित पदों के अनुरूप समायोजन एवं पदोन्नति

महासंघ ने विशेष रूप से उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा जारी संकल्प संख्या-899, दिनांक 29.04.2026, जो जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, जमशेदपुर से संबंधित है, का उल्लेख करते हुए कहा कि उक्त संकल्प के अनुरूप जिस प्रकार विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं एवं वर्तमान कार्य-प्रकृति के आधार पर पदों का पुनर्संरचना की गई है, उसी प्रकार राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा पदों का पुनर्संरचना किया गया है। अतः वहाँ भी पुनर्संरचित पदों के अनुरूप मानव संसाधन की व्यवस्था, पदस्थापन, दायित्व निर्धारण, योग्य कर्मचारियों का समायोजन तथा पात्र नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति की समान एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

महासंघ का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में कार्यरत ऐसे गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारी, जो लंबे समय से संबंधित कार्य कर रहे हैं और जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी योग्यता, अनुभव एवं संबंधित पद की पात्रता है, उनके मामलों को केवल इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि वे वर्तमान में पुराने पद अथवा आउटसोर्स/संविदात्मक व्यवस्था के माध्यम से कार्यरत हैं।

महासंघ की मांग है कि पद पुनर्संरचना के पश्चात उपलब्ध संबंधित पदों के विरुद्ध वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव एवं पात्रता का परीक्षण कर नियमानुसार उन्हें संबंधित पदों पर समायोजित/अवशोषित/नियोजित करने की प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, विश्वविद्यालय के नियमित गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की योग्यता, सेवा अवधि एवं पात्रता को ध्यान में रखते हुए पुनर्संरचित पदों के अनुरूप उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया भी नियमानुसार प्रारंभ एवं पूर्ण की जाए, ताकि पुनर्संरचना का लाभ पात्र एवं कार्यरत कर्मचारियों को मिल सके।

महासंघ का यह भी मत है कि इसी प्रकार की पद-आधारित, योग्यता एवं अनुभव-आधारित पारदर्शी व्यवस्था, जिसमें पुनर्संरचित पदों के अनुरूप योग्य नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति तथा वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी संविदात्मक/आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन अथवा नियोजन पर भी विचार हो, राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी वहाँ की स्वीकृत पद-संरचना एवं लागू नियमों के अनुरूप अपनाई जानी चाहिए।

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विश्वविद्यालयों में पद एवं कार्य के अनुरूप जवाबदेही आवश्यक

महासंघ ने कहा कि विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन के लिए केवल कर्मचारी नियुक्त करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक कर्मचारी का कार्य, पद, योग्यता, दायित्व एवं जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।

विशेष रूप से पद पुनर्संरचना के बाद वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों को उनकी योग्यता, अनुभव एवं पात्रता के अनुरूप संबंधित पदों का दायित्व दिया जाना चाहिए।

इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, कर्मचारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों में उत्तरदायित्व निर्धारित करने में सुविधा होगी।
पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन के गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के समायोजन की मांग

महासंघ ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन के ऐसे गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारी, जो वर्षों से लगातार अपनी सेवाएँ देते आ रहे हैं और जिनका कार्य एवं अनुभव संबंधित विश्वविद्यालय की वर्तमान प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है, उनके भविष्य को अनिश्चित स्थिति में नहीं रखा जाना चाहिए। संबंधित विश्वविद्यालयों के गठन एवं वर्तमान संस्थागत व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ऐसे कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी योग्यता, अनुभव, सेवा अवधि एवं पात्रता का परीक्षण कर, उपलब्ध एवं स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियमानुसार उनके समायोजन/नियोजन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

महासंघ की मांग है कि लंबे समय से कार्यरत इन कर्मचारियों की सेवा एवं अनुभव को उचित महत्व देते हुए सरकार एवं संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन उनके समायोजन/नियोजन के लिए स्पष्ट, पारदर्शी एवं विधिसम्मत नीति निर्धारित करे, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

संविदा कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण की आवश्यकता

विश्वविद्यालय के साथ सीधे संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के समक्ष वेतन पुनरीक्षण एवं वार्षिक वेतनवृद्धि से संबंधित समस्या भी गंभीर बनी हुई है।

नियमित कर्मचारियों के वेतन में नियमानुसार वार्षिक वेतनवृद्धि (Annual Increment) तथा समय-समय पर महंगाई भत्ता (Dearness Allowance—DA) में वृद्धि की व्यवस्था है, जबकि विश्वविद्यालय के साथ सीधे संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के पारिश्रमिक में वृद्धि के लिए ऐसी स्पष्ट, पारदर्शी एवं एकरूप व्यवस्था निर्धारित नहीं है, जिसके आधार पर यह तय हो कि कितनी सेवा अवधि के बाद और किन मानदंडों के आधार पर उनकी वेतनवृद्धि की जाएगी; परिणामस्वरूप उनकी वेतनवृद्धि काफी हद तक संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन की इच्छा पर निर्भर करती है।

अतः संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि, कार्य की प्रकृति, योग्यता एवं संस्थान की आवश्यकता के आधार पर पारदर्शी वेतन पुनरीक्षण एवं वार्षिक वृद्धि की नीति बनाई जानी चाहिए।

आउटसोर्सिंग व्यवस्था और कर्मचारियों के अधिकार

राज्य में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के संबंध में Jharkhand Manpower Procurement (Outsourcing) Manual, 2025 महत्वपूर्ण नीति दस्तावेज है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों/संस्थानों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से प्राप्त मानव संसाधन की प्रक्रिया, श्रेणी, पारिश्रमिक एवं संबंधित व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करना है।

महासंघ का कहना है कि किसी भी आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी के वास्तविक पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा-संबंधी अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

इसके साथ ही Jharkhand Manpower Procurement (Outsourcing) Manual, 2025 में उल्लिखित संबंधित श्रम अधिनियमों एवं प्रावधानों, जैसे Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act (EPF Act), Minimum Wages Act, Payment of Wages Act, Employees’ State Insurance Act (ESIC Act), Payment of Bonus Act, Payment of Gratuity Act, Workmen’s Compensation Act, Maternity Benefit Act तथा अन्य लागू भारतीय श्रम अधिनियमों एवं प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। साथ ही, वर्तमान में प्रभावी श्रम-कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत लागू Labour Codes एवं नियमों को भी, जहाँ प्रासंगिक हो, ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, PF/ESI, बोनस, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ, क्षतिपूर्ति, अवकाश एवं अन्य वैधानिक सेवा-लाभ पूर्ण रूप से सुनिश्चित किए जा सकें।

आउटसोर्स कर्मचारियों के सेवा-संबंधी प्रमुख प्रश्न

1. निर्धारित पारिश्रमिक से संबंधित प्रश्न
वित्त विभाग के आदेश संख्या-478, दिनांक 17.02.2026 के अनुरूप निर्धारित Man-Month Rate को लागू करना आवश्यक है। महासंघ का कहना है कि सरकारी स्तर पर निर्धारित पारिश्रमिक व्यवस्था का लाभ वास्तविक रूप से कर्मचारी तक पहुँचना चाहिए और सेवा प्रदाता के माध्यम से भुगतान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

2. नियुक्ति/सेवा पत्र की समस्या
वित्त विभाग के संकल्प/निर्देश संख्या-1278, दिनांक 03.06.2025 तथा Jharkhand Manpower Procurement (Outsourcing) Manual, 2025 में निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप कर्मचारी को उसकी नियुक्ति/सेवा, कार्य, पारिश्रमिक एवं सेवा-शर्तों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रथम नियोक्ता (Principal Employer) की होती है।

3. वेतन भुगतान में विलंब
महासंघ के संज्ञान में ऐसे मामले हैं जहाँ कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन प्राप्त नहीं होता और कई बार 20–25 दिन तक विलंब होने की शिकायत रहती है। लागू Code on Wages, 2019 तथा संबंधित नियमों/सेवा-शर्तों के अनुरूप वेतन का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। झारखण्ड में Code on Wages से संबंधित राज्य नियम भी अधिसूचित हैं।

4. अवकाश एवं वेतन कटौती
वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1278, दिनांक 03.06.2025 तथा लागू सेवा-शर्तों के अनुरूप अनुमन्य अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और वैध रूप से स्वीकृत अवकाश के संबंध में अनियमित वेतन कटौती की शिकायतों का निराकरण किया जाए।

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5. मातृत्व लाभ
पात्र महिला कर्मचारियों को लागू Code on Social Security, 2020 तथा उस पर लागू राज्य नियमों/प्रावधानों के अनुरूप मातृत्व लाभ एवं संबंधित अधिकार उपलब्ध कराए जाएँ। जहाँ किसी संक्रमणकालीन प्रावधान के कारण पूर्ववर्ती कानून लागू हो, वहाँ संबंधित वैधानिक प्रावधानों का भी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

6. EPF/PF संबंधी समस्या
Code on Social Security, 2020 तथा लागू EPF-संबंधी वैधानिक व्यवस्था के अनुरूप पात्र कर्मचारियों के अंशदान, UAN, जमा राशि एवं संबंधित अभिलेखों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कर्मचारी को यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि उसके नाम पर कितना अंशदान जमा हुआ है।

7. ESIC योगदान जमा होने के बावजूद कार्ड/लाभ उपलब्ध न होना
महासंघ ने विशेष रूप से ऐसी शिकायतों को उठाया है जहाँ कर्मचारी के संबंध में ESIC अंशदान जमा किए जाने की जानकारी तो रहती है, लेकिन कर्मचारी को ESIC पहचान/कार्ड अथवा उससे संबंधित वास्तविक चिकित्सा लाभ प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इसलिए Code on Social Security, 2020 तथा लागू ESI प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक पात्र कर्मचारी का ESIC पंजीकरण कराकर उसे सभी आवश्यक विवरणों से पूर्ण (duly filled with all required details) एवं संबंधित कंपनी/नियोक्ता द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित (duly signed by the concerned company/employer) ESIC कार्ड एक माह के भीतर उपलब्ध कराया जाना तथा कर्मचारी को ESI से प्राप्त होने वाले वास्तविक लाभ सुनिश्चित किया जाना प्रथम नियोक्ता (Principal Employer) की जिम्मेदारी है।

8. वार्षिक वेतन वृद्धि
जहाँ विभागीय अनुशंसा, संविदा, Manual अथवा सरकारी प्रावधान के अनुसार वार्षिक वृद्धि अनुमन्य है, वहाँ उसका स्पष्ट मानदंड बनाकर समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए।

9. बोनस
पात्र कर्मचारियों को लागू Code on Wages, 2019 तथा संबंधित बोनस संबंधी वैधानिक प्रावधानों के अनुसार अनुमन्य बोनस का लाभ दिया जाए।

10. सेवा अवधि एवं अभिलेख
प्रत्येक आउटसोर्स कर्मचारी की सेवा अवधि, कार्य की प्रकृति, पारिश्रमिक, उपस्थिति, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य सेवा-संबंधी विवरण का उचित अभिलेख रखा जाए, ताकि वर्षों से सेवा कर रहे कर्मचारियों का अनुभव प्रशासनिक निर्णयों में वास्तविक रूप से परिलक्षित हो सके।

11. कार्यस्थल की मूलभूत सुविधाएँ
लागू Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 तथा संबंधित नियमों के अनुसार कर्मचारियों के लिए आवश्यक कार्यस्थल सुविधाएँ, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

12. शिकायत निवारण
कर्मचारियों की वेतन, अवकाश, EPF, ESIC, सेवा-पत्र, उपस्थिति एवं अन्य सेवा-संबंधी शिकायतों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर समयबद्ध एवं प्रभावी Grievance Redressal Mechanism बनाया जाए।

वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1278, दिनांक 03.06.2025 का प्रभावी अनुपालन आवश्यक

महासंघ ने विशेष रूप से कहा कि वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1278, दिनांक 03.06.2025 को केवल कागजी निर्देश के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए।

आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित नियुक्ति/सेवा पत्र, पारिश्रमिक, समय पर भुगतान, अवकाश, मातृत्व लाभ, EPF, ESIC, बोनस, वार्षिक वृद्धि तथा अन्य लागू सेवा-सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

महासंघ की मांग है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय प्रशासन अपने अधीन कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के संबंध में यह सत्यापित करे कि सेवा प्रदाता द्वारा सरकारी निर्देशों एवं लागू श्रम कानूनों का वास्तविक अनुपालन किया जा रहा है।

सार्वजनिक धन के उपयोग एवं खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता

महासंघ ने विश्वविद्यालयों में सार्वजनिक धन से होने वाली करोड़ों रुपये की खरीद एवं संसाधनों के उपयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।

महासंघ का कहना है कि विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के उपकरण, किताबें, कंप्यूटर, संसाधन, सेवाएँ एवं अन्य सामग्री की खरीद उपयोग के युक्तिकरण (Rationalization of Use) के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि प्रत्येक खरीद की वास्तविक आवश्यकता, उपयोगिता, गुणवत्ता एवं दीर्घकालीन उपयोग सुनिश्चित हो सके।

एक ओर यदि करोड़ों रुपये संसाधनों की खरीद पर खर्च किए जाते रहें और दूसरी ओर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को समय पर वेतन, निर्धारित पारिश्रमिक, ACP/MACP, पदोन्नति, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश तथा अन्य मूलभूत सेवा-सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो विश्वविद्यालय के सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

अतः महासंघ ने मांग की कि बड़ी खरीद में आवश्यकता एवं उपयोगिता का पूर्व मूल्यांकन, लागू वित्तीय नियमों का पालन, पारदर्शी प्रक्रिया तथा खरीद के बाद वास्तविक उपयोगिता की समीक्षा सुनिश्चित की जाए और जहाँ गंभीर शिकायतें हों वहाँ सक्षम स्तर से जांच कराई जाए।

महासंघ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का उपयोग कर्मचारियों के मूलभूत अधिकारों एवं संस्थान की वास्तविक शैक्षणिक-प्रशासनिक आवश्यकताओं की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

तीन वर्ष या उससे अधिक सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति की मांग

महासंघ ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालय स्थायी प्रकृति की शैक्षणिक संस्थाएँ हैं और इनके प्रशासनिक, तकनीकी एवं गैर-शिक्षकेत्तर कार्य भी नियमित एवं निरंतर प्रकृति के होते हैं। विशेष रूप से Computer Operator जैसे Grade-III प्रकृति के कार्य विश्वविद्यालय के नियमित संचालन के लिए निरंतर आवश्यक हैं। ऐसी स्थिति में इन कार्यों को वर्षों तक संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से संचालित करते रहना और कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक अस्थायी स्थिति में रखना उचित नहीं है।

महासंघ ने कहा कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अनेक कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे हैं, जिनमें कुछ कर्मचारी 10 वर्ष से अधिक तथा कुछ 15 वर्ष से भी अधिक समय से उसी प्रकार के कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। इतनी लंबी सेवा अवधि यह दर्शाती है कि इन कर्मचारियों ने अपने कार्यक्षेत्र में पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव एवं विशेषज्ञता अर्जित की है और कई कर्मचारियों ने अपने कार्यजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा संबंधित संस्थानों की सेवा में लगाया है। ऐसी परिस्थिति में केवल नई नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाकर वर्षों से कार्यरत अनुभवी कर्मचारियों की स्थिति की अनदेखी करना न्यायसंगत नहीं माना जाना चाहिए।

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महासंघ की मांग है कि किसी भी नई नियुक्ति/बहाली की प्रक्रिया से पूर्व संबंधित विश्वविद्यालयों में पहले से कार्यरत ऐसे कर्मचारियों की स्थिति, उनकी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता, अनुभव, सेवा अवधि, पात्रता तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्य की वास्तविक एवं स्थायी प्रकृति का समुचित परीक्षण किया जाए। जहाँ संबंधित कार्य स्थायी एवं निरंतर प्रकृति का है तथा उसके लिए स्वीकृत एवं पुनर्संरचित नियमित पद उपलब्ध हैं, वहाँ इन अनुभवी कर्मचारियों को उनकी दीर्घ सेवा एवं अर्जित अनुभव को उचित महत्व देते हुए लागू कानून, भर्ती नियम, आरक्षण प्रावधान एवं विधिक प्रक्रिया के अनुरूप स्थायी/नियमित नियुक्ति प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा विशेष नीति एवं प्रक्रिया तैयार की जाए।

महासंघ ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग यह है कि वर्षों से संस्थानों को अपनी सेवाएँ दे रहे मौजूदा अनुभवी कर्मचारियों को केवल नई भर्ती के माध्यम से प्रतिस्थापित करने के बजाय उनकी सेवा अवधि, अनुभव और पात्रता को पहले समुचित रूप से विचार में लिया जाए तथा उन्हें विधिसम्मत तरीके से स्थायी/नियमित सेवा में लाने की दिशा में सरकार ठोस निर्णय ले।

दोनों महासंघों की 12 प्रमुख मांगें

1. ACP/MACP का लाभ मिले — सभी पात्र नियमित शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लंबित ACP/MACP मामलों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन किया जाए।
2. लंबित पदोन्नति की जाए — पात्र नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया सेवा अवधि, योग्यता एवं लागू नियमों के आधार पर समयबद्ध रूप से पूरी की जाए।
3. राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पुनर्संरचित पदों के अनुरूप समायोजन एवं पदोन्नति हो — जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय से संबंधित उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या-899, दिनांक 29.04.2026 सहित राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में पुनर्संरचित एवं उपलब्ध पदों के विरुद्ध वर्तमान योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों का योग्यता, अनुभव एवं पात्रता के आधार पर नियमानुसार समायोजन/अवशोषण/नियोजन किया जाए तथा पात्र नियमित कर्मचारियों की पुनर्संरचित पदों के अनुरूप पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
4. पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट कर्मचारियों का समायोजन हो — जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, जमशेदपुर सहित राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन के वर्षों से कार्यरत योग्य एवं अनुभवी गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को उनकी योग्यता, अनुभव एवं सेवा अवधि के आधार पर उपलब्ध एवं स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियमानुसार समायोजित/नियोजित किया जाए।
5. संविदा कर्मचारियों के वेतन का पारदर्शी पुनरीक्षण हो — सेवा अवधि, कार्य एवं योग्यता के आधार पर नियमित वार्षिक वृद्धि एवं समय-समय पर पारिश्रमिक पुनरीक्षण की नीति बनाई जाए।
6. Man-Month Rate लागू हो — वित्त विभाग के आदेश संख्या-478, दिनांक 17.02.2026 के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों का निर्धारित Man-Month Rate तत्काल लागू कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
7. आउटसोर्स कर्मचारियों के वैधानिक लाभ मिलें — लागू Labour Codes, Jharkhand Rules, Outsourcing Manual 2025 तथा वित्त विभाग के संकल्प संख्या-1278 के अनुरूप वेतन, अवकाश, EPF, ESIC, मातृत्व लाभ, बोनस एवं अन्य अनुमन्य सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
8. समय पर वेतन भुगतान हो — निर्धारित वेतन भुगतान की तय समय-सीमा/अवधि के भीतर कर्मचारियों को वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित समय-सीमा/अवधि के बाद 20–25 दिनों तक वेतन भुगतान में विलंब न हो।
9. पात्र कर्मचारियों के सेवा-अभिलेख एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हों — नियुक्ति/सेवा पत्र, EPF/UAN, ESIC पहचान एवं अन्य आवश्यक अभिलेख कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाएँ।
10. तीन वर्ष या अधिक सेवा वाले कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति की नीति बने — योग्यता, अनुभव, पात्रता एवं उपलब्ध स्वीकृत पदों के आधार पर लागू नियमों के अनुरूप स्थायी नियुक्ति/नियमितीकरण की वैधानिक प्रक्रिया बनाई जाए।
11. नियमित गैर-शिक्षकेत्तर भर्ती प्रारम्भ हो — आवश्यक स्वीकृत एवं रिक्त पदों का आकलन कर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ की जाए तथा नई (Fresh) भर्ती से पूर्व वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों को उनकी योग्यता, अनुभव, सेवा अवधि एवं पात्रता के आधार पर नियमानुसार नियमित नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।
12. सार्वजनिक धन एवं प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो — करोड़ों रुपये की खरीद में आवश्यकता एवं उपयोगिता का मूल्यांकन, वित्तीय नियमों का पालन और कर्मचारियों के मूलभूत सेवा-अधिकारों की प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए।

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