एक्सएलआरआई में KRONOS 2026 का आयोजन, भविष्य की कंपनियों में नेतृत्व और प्रतिभा की भूमिका पर मंथन

जमशेदपुर : एक्सएलआरआई – जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में 27 अक्टूबर 2026 को वार्षिक प्रमुख एचआर सम्मेलन KRONOS 2026 के छठे संस्करण का आयोजन किया गया। PGDM (GM) कॉन्क्लेव कमेटी, कॉरपोरेट रिलेशंस एंड प्लेसमेंट की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में 23 मुख्य मानव संसाधन अधिकारियों (CHROs) और वरिष्ठ एचआर लीडर्स ने हिस्सा लिया। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Who Will Build the Company of Tomorrow? The New Rules of Leadership, Talent & Performance” रही। इसमें भविष्य की कंपनियों के निर्माण, नेतृत्व की बदलती भूमिका, प्रतिभा प्रबंधन और संगठनात्मक प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना था कि बदलते कारोबारी माहौल में CHROs किस तरह संगठनात्मक ढांचे को बेहतर बनाने, कर्मचारियों के प्रदर्शन को मजबूत करने और संस्थानों तथा उनके कर्मचारियों के बीच संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने में भूमिका निभा सकते हैं।


कार्यक्रम का उद्घाटन एक्सएलआरआई जमशेदपुर के डीन (एकेडमिक्स) डॉ. संजय पात्रो और एसोसिएट डीन – कॉरपोरेट प्रोग्राम्स एंड VIL प्रो. सुनील कुमार सारंगी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान कई वरिष्ठ मानव संसाधन विशेषज्ञ मौजूद रहे। उद्घाटन संबोधन में डॉ. संजय पात्रो ने वर्ष 1984–85 के भारत के प्रौद्योगिकी मिशन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में बैंकों और रेलवे के कर्मचारियों के बीच कंप्यूटरीकरण को लेकर विरोध हुआ था, लेकिन बाद में प्रौद्योगिकी क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसरों में से एक बनकर उभरा। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से वर्तमान समय में भारत की प्रतिभा और उद्योग जगत के नेतृत्व की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों से विचार करने का आग्रह किया कि मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला भारत अपनी सामूहिक बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल व्यापक सामाजिक हित के लिए किस तरह कर सकता है। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग जगत के नेताओं के साथ सक्रिय संवाद करने और भविष्य की अलग-अलग संभावनाओं को समझते हुए उनके अनुरूप तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
सम्मेलन का पहला पैनल “The Organization Without a Blueprint” संगठनात्मक ढांचे में हो रहे बदलावों पर केंद्रित रहा। इस विषय पर दो समानांतर सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र का संचालन एक्सएलआरआई के PGDM (GM) कार्यक्रम के विद्यार्थी अनीश चोपड़ा ने किया। इसमें Fornax के अभिषेक नाग, Cisco के गौरव अहलूवालिया, Kalamandir Jewellers Group के प्रसेनजीत मुखर्जी, KPMG India की रीना वाही, NaBFID के संजीव वैद्य और Axeno Consulting की स्वाति मुदगल शामिल हुईं। पैनल में उद्देश्य-आधारित संगठनात्मक संरचना, ग्राहक-केंद्रित कार्यप्रणाली, पारदर्शी जवाबदेही और खुले संवाद की जरूरत पर चर्चा हुई। संजीव वैद्य ने बताया कि NaBFID ने अपने संगठनात्मक ढांचे को उद्देश्य, जवाबदेही और ग्राहकों की जरूरतों के आधार पर तैयार किया है, जिसमें संचालन की केवल तीन परतें हैं। वहीं, प्रसेनजीत मुखर्जी ने अधिकारों के स्पष्ट वितरण के लिए डेलीगेशन ऑफ अथॉरिटी मैट्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि संगठनों को अनावश्यक नौकरशाही कम करनी चाहिए, कार्यप्रणाली में लचीलापन बनाए रखना चाहिए और मानवीय विवेक को एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में पहचानना चाहिए।
इसी पैनल के दूसरे सत्र का संचालन PGDM (GM) की छात्रा अंशिता दागा ने किया। इसमें Axeno Consulting की बुशरा मेहदी, Genzeon की जननी प्रकाश, Snowflake की कविता टंडन, PwC AC India की संध्या नांबियार और Iris Software के शरद वर्मा ने भाग लिया। चर्चा के दौरान बताया गया कि कठोर पदानुक्रम और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएं निर्णय लेने की गति को प्रभावित कर सकती हैं। पैनलिस्टों ने मध्य-स्तरीय प्रबंधन को अधिक अधिकार देने और भर्ती के दौरान सीखने की क्षमता तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की योग्यता को महत्व देने की बात कही। उन्होंने यह भी चर्चा की कि भविष्य के प्रबंधकों को ऐसी टीमों का नेतृत्व करने के लिए तैयार रहना होगा, जिनमें इंसानों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एजेंट भी काम करेंगे। सत्र का प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि संगठनात्मक ढांचा व्यावसायिक रणनीति के अनुरूप होना चाहिए और कारोबारी जरूरतों में बदलाव के साथ विकसित होना चाहिए।
दूसरा पैनल “The Performance Paradox” संगठन की दक्षता और दीर्घकालिक क्षमता के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रहा। इसका संचालन PGDM (GM) के विद्यार्थी निमिष बत्रा ने किया। पैनल में Daimler Truck Innovation Center India के हर्षवर्धन कुंडलकर, Acer की इंदु रश्मि, Omega Seiki Mobility के नितिन खिंद्रिया, Hindalco Industries Limited के समिक बसु, Accenture के सिद्धार्थ मुखर्जी और NaBFID के सौमिक रॉय शामिल हुए। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल काम की गति या तात्कालिक दक्षता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। संगठनों को समस्याओं के शुरू से अंत तक समाधान, सक्षम प्रतिभाओं की पर्याप्त उपलब्धता, सामूहिक जिम्मेदारी और स्पष्ट रणनीति पर भी ध्यान देना चाहिए। पैनलिस्टों ने विभागों के बीच अलगाव, कर्मचारियों की घटती भागीदारी और आंतरिक प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के प्रति आगाह किया। इस दौरान “वॉटरमेलन इफेक्ट” की अवधारणा पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रदर्शन से जुड़े डैशबोर्ड के आंकड़े बाहर से अच्छे दिखाई देते हैं, लेकिन संगठन की वास्तविक संस्कृति और आंतरिक स्थिति अलग हो सकती है। पैनल ने संकेत दिया कि प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि कर्मचारियों की भागीदारी और संगठन की वास्तविक कार्यक्षमता को ध्यान में रखकर भी किया जाना चाहिए।
तीसरा पैनल “The New Employment Deal” रोजगार संबंधों, प्रतिभा प्रबंधन और नेतृत्व की बदलती अपेक्षाओं पर केंद्रित रहा। इसका संचालन PGDM (GM) के विद्यार्थी वामसीधर अधिनारायण ने किया। पैनल में TVS Motor Company के कार्तिक पंचपकेसन, Cyient की कविता कुरुप, Deloitte Consulting India Private Limited के पर्वतराजन मुथुसामी, Zydus Wellness के शांतनु दास, Tata Steel की सोनी सिन्हा और Tata Chemicals Limited के श्रीनिवास सीआर शामिल हुए। सत्र के दौरान विद्यार्थियों के लिए एक संवादात्मक गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें उन्हें रंगीन कार्ड के माध्यम से नेतृत्व के एक रिक्त पद को भरने के लिए उपयुक्त व्यक्ति के चयन पर अपनी राय देने को कहा गया। इस गतिविधि ने प्रतिभा चयन और नेतृत्व संबंधी निर्णयों में अलग-अलग दृष्टिकोणों को सामने रखा।
Tata Steel की सोनी सिन्हा ने कहा कि नेतृत्व के लिए जरूरी क्षमताएं संगठन की परिस्थितियों और कार्यक्षेत्र के अनुसार बदलती हैं। उन्होंने बताया कि विनिर्माण क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव से प्राप्त अप्रकट ज्ञान (Tacit Knowledge) और स्थिरता महत्वपूर्ण हैं, जबकि तेजी से बदलते कारोबारी क्षेत्रों में तेजी से काम करने और परिणाम देने की मानसिकता की जरूरत होती है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के वर्ष 2030 तक नौकरियों और कौशल में बड़े बदलावों के अनुमानों का उल्लेख करते हुए पैनलिस्टों ने रोजगार संबंधों में आ रहे परिवर्तन पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक नौकरी सुरक्षा की अवधारणा के साथ अब कर्मचारी की रोजगार पाने और बदलती जरूरतों के अनुरूप काम करने की क्षमता यानी एम्प्लॉयबिलिटी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसके साथ ही, तकनीकी बदलावों के दौर में मनोवैज्ञानिक सुरक्षा, जिज्ञासा और संगठनात्मक संस्कृति को भी आवश्यक बताया गया।
KRONOS 2026 का आयोजन प्रो. डॉ. कनागराज अय्यालुसामी और श्री रजनी रंजन के मार्गदर्शन में PGDM (GM) कॉन्क्लेव कमेटी, बैच 2026–27 ने किया। समिति में अबिरामी एस, मॉरिस एम, मुस्कान गुप्ता, स्तुति पटवर्धन और उत्कर्ष सूरी शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन आदित्य मदान, अबिरामी एस, हार्दिक धवन, मानसी पोटनिस, वरुण गोपू और जिज्ञासा हिरावत ने किया। सम्मेलन के माध्यम से एक्सएलआरआई ने उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व और विद्यार्थियों को एक साझा मंच पर लाकर भविष्य के नेतृत्व, प्रतिभा प्रबंधन और संगठनात्मक प्रदर्शन से जुड़े अनुभवों तथा विचारों के आदान-प्रदान की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम ने जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने और व्यापक सामाजिक हित में योगदान देने की संस्थान की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।


