सुप्रीम कोर्ट में PIL पर मचा हंगामा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रीय पुत्र’ घोषित करने की मांग पर सुनवाई में तीखी टिप्पणी


नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब याचिकाकर्ता ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “राष्ट्रीय पुत्र” घोषित करने और आज़ाद हिंद फौज (INA) को भारत की स्वतंत्रता का श्रेय देने की मांग रखी। कोर्ट ने इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया और इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस तरह की बार-बार दायर की जा रही याचिकाएं अदालत का समय बर्बाद करती हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि पहले भी इसी तरह की याचिका खारिज की जा चुकी है और भविष्य में ऐसी याचिकाओं पर रोक लगाने की चेतावनी दी गई।
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि नेताजी की जयंती और आज़ाद हिंद फौज के स्थापना दिवस को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे निर्णय नीति-निर्माण के दायरे में आते हैं और न्यायपालिका इस पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।


