सुवर्णरेखा में हजारों मछलियों की मौत, जांच रिपोर्ट में टाटा स्टील को ठहराया जिम्मेदार



जमशेदपुर : सुवर्णरेखा नदी में 1 अप्रैल 2026 को हजारों मछलियों की मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), कोलकाता के आदेश पर गठित उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति ने रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में टाटा स्टील लिमिटेड, जमशेदपुर को पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। समिति के अनुसार, 31 मार्च की शाम टाटा स्टील के कोक ओवन प्लांट के ईटीपी नंबर-5 से अधिक BOD और COD वाला औद्योगिक अपशिष्ट सुसुनगड़िया नाले में छोड़ा गया, जो सुवर्णरेखा नदी में पहुंचा। इससे ऑक्सीजन का स्तर घटा और करीब 2 किलोमीटर के दायरे में हजारों मछलियों की मौत हुई।


समिति ने OCEMS के आंकड़ों की जांच में पाया कि 31 मार्च की शाम 6 बजे BOD 439.61 एमजी प्रति लीटर था, जो सामान्य औसत 30 एमजी प्रति लीटर के मुकाबले करीब 33 गुना अधिक था। COD 880.80 एमजी प्रति लीटर तक पहुंच गया था। 31 मार्च की शाम 6:15 बजे से 1 अप्रैल की रात 2:45 बजे तक का डाटा पोर्टल पर उपलब्ध नहीं था। समिति ने डाटा ट्रांसमिशन जानबूझकर रोकने या उसमें छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है। JSPCB ने 2 अप्रैल को लाल भट्टा और बाबूडीह घाट से लिए सैंपल में डिजॉल्व ऑक्सीजन 1.6 एमजी प्रति लीटर पाया, जबकि रिपोर्ट के अनुसार जलीय जीवों और मछलियों के जीवित रहने के लिए कम से कम 4.0 एमजी प्रति लीटर ऑक्सीजन जरूरी है।
रिपोर्ट में टाटा स्टील द्वारा उद्योग-विशिष्ट डिस्चार्ज मानकों और JSPCB के Consent to Operate की शर्त संख्या-18 यानी Zero Liquid Discharge के उल्लंघन की बात भी कही गई है। समिति ने कंपनी पर पर्यावरण मुआवजा लगाने और अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह ZLD हासिल होने तक डिस्चार्ज मानकों का कड़ाई से पालन कराने की सिफारिश की है। टाटा स्टील के प्रवक्ता राजेश राजन ने कहा कि मामला एनजीटी में विचाराधीन है और कंपनी अपना पक्ष रख चुकी है। सुनवाई के बाद जो भी आदेश होगा, कंपनी उसका अक्षरशः पालन करेगी।


