एनआईए जांच में सनसनीखेज खुलासा, बीएसएफ के कारतूस उग्रवादियों तक पहुंचाने का खेल उजागर






रांची : एनआईए की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है जिसमें बीएसएफ के कारतूसों की अवैध सप्लाई का नेटवर्क उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि बीएसएफ के फिरोजपुर, जालंधर और जैसलमेर कैंप से कारतूस निकालकर उन्हें आपराधिक गिरोहों और उग्रवादी संगठनों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में पूर्व जवान अरुण कुमार सिंह उर्फ फौजी और उसके सहयोगी कार्तिक बेहरा की भूमिका सामने आई है।


जांच के अनुसार, फायरिंग अभ्यास के दौरान उपयोग न हुए कारतूसों को रिकॉर्ड में इस्तेमाल दिखाकर बचा लिया जाता था। इन्हें इकट्ठा कर बाद में गिरोह के माध्यम से नक्सली और अपराधी नेटवर्क को बेचा जाता था। बताया गया कि इस पूरे रैकेट के जरिए हजारों कारतूस की अवैध सप्लाई की गई और आरोपी अलग-अलग स्थानों पर ट्रेन और सड़क मार्ग से इसकी डिलीवरी करते थे।
एनआईए ने जांच में यह भी पाया है कि आरोपी कई बार बीएसएफ कैंपों के आसपास स्थित होटलों में रुके थे, जिससे उनके नेटवर्क की पुष्टि हुई है। एजेंसी अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और इस अवैध हथियार नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।


