भोजपुरी रैप से रितिक राज ने बनाई पहचान, एमटीवी हसल सीजन-5 के ग्रैंड फिनाले में पहुंचे

जमशेदपुर : अंडरग्राउंड रैप की दुनिया में भोजपुरी के जरिए पहचान बनाने वाले राज बाबू यानी रितिक राज एमटीवी हसल सीजन-5 के ग्रैंड फिनाले तक पहुंच चुके हैं। आदित्यपुर रोड नंबर-12 निवासी रितिक ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भोजपुरी रैप को लेकर उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा। शुरुआत में वह अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी में रैप करते थे और एमटीवी हसल के ऑडिशन के लिए कई बार प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिली। बाद में दोस्तों की सलाह पर भोजपुरी में रैप शुरू किया और उनके मुताबिक इसी भाषा ने एमटीवी हसल तक पहुंचने में अहम भूमिका निभायी। उन्होंने डीएवी बिष्टुपुर से प्रारंभिक शिक्षा और आरका जैन विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक किया है।


रितिक ने 2018 में जमशेदपुर हिप-हॉप टीवी से अपना सफर शुरू किया। 2021-22 में साइफर, बैटल और हिप-हॉप कार्यक्रमों के जरिए शहर के कलाकारों को मंच दिया और 2023 में दिल्ली जाकर स्वतंत्र कलाकार के रूप में भोजपुरी रैप शुरू किया। 2024 में वह स्पोटीफाइ रैप 91 में प्रस्तुति देने वाले पहले एकल भोजपुरी रैप कलाकार बने। उनके एलबम बयार को भी पहचान मिली। 2025 में वह टीवीएफ के सेना : गार्डियंस ऑफ द नेशन और शेर की दहाड़ से जुड़े तथा अनुराग कश्यप की फिल्म निशानची भाग-2 के गीत खूंखार निशानची में सहयोग किया। 2026 में ग्राम चिकित्सालय-2 में उनका गीत 21 रुपैया शुरुआती गीत बना।
रितिक का पैतृक घर बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में है। उनके पिता स्व. रितेश कुमार पत्रकार थे और मां प्रीति देवी गृहिणी हैं। वह पिता की रचनात्मकता को अपनी प्रेरणा मानते हैं और भिखारी ठाकुर, विनोद ओझा व माधव निर्मल समेत कई साहित्यकारों की रचनाएं पढ़ चुके हैं। संगीत को करियर बनाने वाले रितिक आज भी किराये के घर में रहते हैं और अपना घर व कार उनका सपना है। उन्होंने जमशेदपुर समेत बिहार-झारखंड के लोगों से 5 अक्टूबर, शाम 7 बजे तक उनके लिए मतदान करने की अपील की है। उनके मुताबिक, जियो ऐप या जियोहॉटस्टार पर हसल अपना होमग्राउंड खोजकर मतदान किया जा सकता है और एक व्यक्ति 24 घंटे में अधिकतम 99 बार मतदान कर सकता है।


