हलाला के बाद दोबारा निकाह से इनकार अपराध नहीं, इमरान हुसैन को अग्रिम जमानत

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाक और हलाला की प्रक्रिया के बाद महिला के दूसरे व्यक्ति से शादी कर लेने पर पूर्व पति का उससे दोबारा निकाह करने से इनकार करना अपने आप में संज्ञेय अपराध नहीं है। जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत ने इस मामले में इमरान हुसैन को अग्रिम जमानत दी। अदालत ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ या सामान्य आपराधिक कानून में ऐसा कोई प्रावधान सामने नहीं आया, जिसके तहत केवल इनकार के आधार पर पूर्व पति को दोबारा शादी के लिए मजबूर किया जा सके।


मामला गिरिडीह के धनवार का है। इमरान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है। इमरान की ओर से बताया गया कि वर्ष 2020 में भी मामला दर्ज हुआ था, जिसमें समझौता हो गया था। बाद में तलाक हुआ और महिला ने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली। महिला की ओर से कहा गया कि पुराने समझौते में इमरान ने दोबारा शादी का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में इनकार कर दिया।
अदालत ने इमरान को तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी की स्थिति में 25 हजार रुपये के जमानत बांड और समान राशि के दो जमानतदारों पर उसे जमानत देने का आदेश दिया गया है।


