सोना देवी विश्वविद्यालय में 30 एवं 31 अक्टूबर को होगा दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार

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घाटशिला: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को “Contemporary Global Scenario and Indian Knowledge System: An Analytical Discourse” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय सेमिनार का उद्देश्य समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता, उसकी समृद्ध बौद्धिक विरासत तथा आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक विकास में उसकी संभावनाओं पर गंभीर शैक्षणिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।

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विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय सेमिनार में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े विद्वानों की सहभागिता होगी। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक चिंतन के बीच संवाद स्थापित करने तथा ज्ञान, विचारों एवं शोध-अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय सेमिनार का उद्देश्य एवं प्रासंगिकता

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, सामाजिक संरचना और मानवीय मूल्यों में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन केवल अतीत की विरासत को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके विचारों, सिद्धांतों और जीवन-दृष्टि की समकालीन उपयोगिता का विश्लेषण करना भी आवश्यक है।

भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, साहित्य, भाषा, संस्कृति, नैतिकता, प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण और जीवन-मूल्यों से संबंधित व्यापक बौद्धिक विरासत समाहित है। इस सेमिनार के माध्यम से इन विविध आयामों पर अकादमिक चर्चा करते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में किस प्रकार सार्थक योगदान दे सकती है।

इस आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, शोधपरक दृष्टिकोण और भारतीय ज्ञान-विरासत के प्रति अकादमिक रुचि को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण के बीच संवाद की संभावनाओं को आगे बढ़ाना भी इस सेमिनार के महत्व को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुजीत कुमार एवं डॉ. मनोरंजन बार

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इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुजीत कुमार एवं डॉ. मनोरंजन बार हैं। उनके समन्वय में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विषयों के विद्वानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, ताकि भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता पर विचारों का आदान-प्रदान हो सके तथा अनुसंधान की नई संभावनाओं को प्रोत्साहन मिले।

डॉ. शिवचन्द्र झा ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के समकालीन अध्ययन को बताया आवश्यक

सोना देवी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने राष्ट्रीय सेमिनार के विषय-वस्तु का परिचय देते हुए भारतीय ज्ञान प्रणाली की समृद्ध परंपरा और वर्तमान वैश्विक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, “भारतीय ज्ञान प्रणाली हमारी सभ्यता की दीर्घकालीन बौद्धिक परंपरा, दार्शनिक चिंतन, सामाजिक अनुभवों और जीवन-मूल्यों का महत्वपूर्ण आधार है। समकालीन वैश्विक परिदृश्य में इस ज्ञान परंपरा का अध्ययन केवल ऐतिहासिक दृष्टि से करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी आवश्यक है कि इसके विचार और सिद्धांत आज की शैक्षणिक, सामाजिक एवं बौद्धिक चुनौतियों के संदर्भ में कितने प्रासंगिक हैं।”

डॉ. झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक चिंतन के बीच संवाद स्थापित करने के लिए आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सेमिनार शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विभिन्न विचारधाराओं को समझने, अपने दृष्टिकोण का विस्तार करने तथा नए शोध-विषयों की पहचान करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सेमिनार भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित करेगा और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए विचारों तथा अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाएगा।

सहायक कुलसचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने शैक्षणिक संवाद को बताया महत्वपूर्ण

सोना देवी विश्वविद्यालय की सहायक कुलसचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेमिनार विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को व्यापकता प्रदान करने और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली हमारी समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका समकालीन संदर्भों में अध्ययन करना और आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से इसके संबंधों को समझना आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में नई दृष्टि विकसित करने के साथ-साथ उन्हें आलोचनात्मक चिंतन, ज्ञान के विश्लेषण और शोध की संभावनाओं की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह सेमिनार विश्वविद्यालय में अकादमिक सहयोग और अनुसंधान की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा—शैक्षणिक संवाद और अनुसंधान की संस्कृति को मिलेगी मजबूती

सोना देवी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा, “राष्ट्रीय सेमिनार विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और अनुसंधान की संस्कृति को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली हमारी समृद्ध बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। आवश्यकता इस बात की है कि हम इस विरासत का अध्ययन समकालीन संदर्भों में करें और इसकी प्रासंगिकता को अकादमिक दृष्टिकोण से समझें। इस सेमिनार के माध्यम से शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्वानों को अपने विचार साझा करने तथा नए शोध-विषयों की संभावनाओं पर विमर्श करने का अवसर मिलेगा।”

कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा—भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक चिंतन के बीच स्थापित होगा सार्थक संवाद

सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा, “भारतीय ज्ञान प्रणाली हमारी सभ्यता की बौद्धिक उपलब्धियों, जीवन-दृष्टि और अनुभवों का महत्वपूर्ण आधार है। आज के वैश्विक परिवेश में इसकी प्रासंगिकता को समझने के लिए आवश्यक है कि हम परंपरा का अध्ययन तार्किक, विश्लेषणात्मक और अनुसंधानपरक दृष्टिकोण से करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में विवेक, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। हमें विश्वास है कि यह राष्ट्रीय सेमिनार भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन वैश्विक चिंतन के बीच सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करेगा तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नए विचारों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।”

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माननीय श्री सरयू राय एवं प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार सहित गणमान्य अतिथियों की सहभागिता प्रस्तावित

सेमिनार के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों एवं आमंत्रित अतिथियों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक एवं झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति के अध्यक्ष माननीय श्री सरयू राय तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) गौतम सूत्रधार सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

इन प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति से सेमिनार में भारतीय ज्ञान प्रणाली, समकालीन वैश्विक चुनौतियों, उच्च शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श को व्यापकता मिलने की उम्मीद है।

उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को मिलेगा प्रोत्साहन

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श के साथ-साथ शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधानपरक दृष्टिकोण और ज्ञान के व्यापक प्रसार को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करेगा। इसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैश्विक चिंतन के बीच सार्थक संबंधों को समझने तथा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नए विचारों और शोध की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

सोना देवी विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में इस राष्ट्रीय सेमिनार को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के रूप में देखता है। विश्वविद्यालय को विश्वास है कि यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन उपयोगिता को समझने, अकादमिक सहयोग को मजबूत करने तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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