राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू फिर ऐतिहासिक उड़ान भरेंगी, तेजस विवाद के बीच रक्षा शक्ति का बड़ा संदेश

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर से भारतीय वायुसेना के साथ जुड़कर एक महत्वपूर्ण उड़ान कार्यक्रम में हिस्सा लेने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब तेजस विमान को लेकर असं.[ HAL और वायुसेना के बयान को ध्यान में रखते हुए बताया गया है कि तेजस का कोई क्रैश नहीं हुआ है और हाल ही के रिपोर्ट्स तकनीकी मुद्दे तक सीमित हैं।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति मुर्मू जैसलमेर में हो रहे वायु शक्ति-2026 अभ्यास के दौरान स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ में उड़ान भरेंगी। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपनी युद्ध क्षमता का प्रदर्शन कर रही है।

यह राष्ट्रपति के लिए एक और गर्व का पल है। इससे पहले वह सुखोई-30 एमकेआई और राफेल लड़ाकू जेट में भी उड़ान भरी चुकी हैं और वे भारत के सशस्त्र बलों की तैयारियों का समर्थन कर चुकी हैं। इसके साथ यह संदेश भी जाता है कि देश अपनी रक्षा क्षमताओं पर भरोसा रखता है।

राष्ट्रपति का यह कदम भारतीय रक्षा उत्पादन और मेक-इन-इंडिया विमान तकनीक के प्रति विश्वास को जाहिर करता है। इससे सेना कर्मियों और देशवासियों को भी आत्म-विश्वास मिलता है। दक्षिणी थल और वायुपथ पर ऐसे प्रदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।इस कार्यक्रम में वायु सेना प्रमुख और रक्षा अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण उड़ानों तथा अन्य प्रदर्शन भी देखने को मिलेंगे, जिनमें विभिन्न उन्नत विमानों और हेलिकॉप्टरों की क्षमताएँ शामिल होंगी।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उड़ान भारतीय वायु सेना के साथ जुड़कर देश की सामरिक क्षमता को दिखाती है और नव-युग के स्वदेशी विमान कार्यक्रमों को बढ़ावा देती है।

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