करम पर्व की तैयारी शुरू, जावारानी माता की 7 दिनों तक सेवा करेंगी कुंवारी युवतियां



जमशेदपुर : करम पर्व को लेकर आदिवासी उरांव समाज की विभिन्न शाखाओं ने बुधवार को सुवर्णरेखा नदी घाट से जावारानी माता के लिए बालू का उठाव किया। सुबह सीतारामडेरा, बिरसानगर, उलीडीह, शंकोसाई, बागबेड़ा, हुरलुंग और नूतनडीह से युवाओं की टीम नदी घाट पहुंची। युवतियों ने बालू में विभिन्न प्रकार के बीज मिलाकर जावा तैयार किया। इसके साथ ही जावारानी माता की पारंपरिक सेवा शुरू हो गई। कुंवारी युवतियां 22 सितंबर तक यानी 7 दिनों तक सुबह-शाम धूप-धूणा दिखाकर पूजा और सेवा करेंगी। 21 सितंबर की शाम करम अखड़ा में पारंपरिक करम गीत गाकर जावा जागरण किया जाएगा।


22 सितंबर की दोपहर अविवाहित युवक जंगल में पूजा-अर्चना के बाद करम डाली यानी करम राजा लेकर आएंगे। मांदर और नगाड़े की थाप के बीच नाचते-गाते करम डाली को बस्ती में भ्रमण कराने के बाद अखड़ा में स्थापित किया जाएगा। शाम को पारंपरिक पाहन पूजा करेंगे और समाज के लोगों को करम राजा की कथा सुनाई जाएगी। इसके बाद व्रतधारी उपवास तोड़ेंगे और रातभर विभिन्न अखड़ों में सामूहिक नृत्य होगा।
23 सितंबर की दोपहर सामूहिक शोभायात्रा निकालकर करम राजा का नदी में विसर्जन किया जाएगा। विभिन्न बस्तियों के करम अखड़ा से समाज के लोग मांदर और नगाड़े की थाप पर नाचते-गाते विदाई देंगे। शाम को लोग एक-दूसरे के घर जाकर परना मंडी (भोजन) ग्रहण करेंगे और पर्व की शुभकामनाएं देंगे। सीतारामडेरा में पाहन बुधु मिंज, संचु खालखो और भोला कच्छप तथा कथावाचक सुखराम लकड़ा और सोमा कोया होंगे। बिरसानगर में महावीर कुजूर और गणेश कुजूर, उलीडीह में पांडु कुजूर और राजेश्वर किस्पोट्टा, शंकोसाई में बासु लकड़ा और आदिति तिर्की तथा बागबेड़ा में बुधराम टोप्पो जिम्मेदारी निभाएंगे।


