डीसी के निर्देश पर हुआ था पदस्थापन, फिर महीने भर के भीतर ही क्यों बदला फैसला? गम्हरिया सीएचसी के आदेश से उठे कई सवाल

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सरायकेला-खरसावां : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गम्हरिया द्वारा जारी एक कार्यालय आदेश ने जिले के स्वास्थ्य महकमे में नई बहस छेड़ दी है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सीएचसी गम्हरिया द्वारा जारी आदेश में पूर्व में किए गए पदस्थापन संबंधी आदेशों को निरस्त करते हुए 15 एएनएम कर्मियों को पुनः उनके पूर्ववत संस्थानों में कार्य करने का निर्देश दिया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।सूत्रों के अनुसार, जिन एएनएम कर्मियों का हाल ही में पदस्थापन किया गया था, वह जिला प्रशासन के स्तर पर लिए गए निर्णय तथा उपायुक्त (डीसी) के निर्देशों के आलोक में किया गया था। ऐसे में महज कुछ ही सप्ताह अथवा एक माह के भीतर उस आदेश को वापस लेकर कर्मियों को पुनः पुराने कार्यस्थलों पर भेजे जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पदस्थापन का निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता और उच्चस्तरीय निर्देशों के आधार पर लिया गया था, तो फिर उसे इतनी जल्दी निरस्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। आखिर किसके निर्देश पर पहले पदस्थापन किया गया और किसके निर्देश पर उसे पूर्ववत कर दिया गया? यदि पहले का निर्णय सही था तो उसे वापस क्यों लिया गया और यदि वर्तमान निर्णय उचित है तो पहले आदेश जारी करने की जवाबदेही किसकी थी?

हालांकि इस आदेश को पूर्ववत किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दबे जुबान से लोग जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था और विभागीय स्तर पर कथित मनमानी की भी चर्चा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई लोग मानते हैं कि बार-बार पदस्थापन और स्थानांतरण संबंधी आदेशों में बदलाव से न केवल स्वास्थ्य कर्मियों के बीच असमंजस की स्थिति बनती है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है।

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सूत्रों का कहना है कि कई एएनएम कर्मियों ने नए कार्यस्थलों पर योगदान देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, लेकिन अब उन्हें फिर से पुराने संस्थानों में लौटने का निर्देश दिया गया है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के बीच यह चर्चा है कि यदि प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर पदस्थापन किया गया था, तो फिर इतने कम समय में परिस्थितियां ऐसी क्या बदल गईं कि पूरे आदेश को ही वापस लेना पड़ा।

विभाग के अंदरूनी हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे विभागीय समन्वय की कमी बता रहे हैं तो कुछ इसे प्रशासनिक निर्णयों में अस्थिरता का उदाहरण मान रहे हैं। वहीं, यह मामला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता नजर आ रहा है। जब जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, तब पदस्थापन संबंधी आदेशों में बार-बार बदलाव व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर सवालों का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस फैसले के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और क्या विभाग जनता तथा स्वास्थ्य कर्मियों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब देगा।

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