पीएम-एबीएचआईएम के ₹125 करोड़ में सिर्फ ₹34.93 करोड़ खर्च, 20 जिलों में भुगतान शून्य

रांची : झारखंड में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) की राशि खर्च करने में कई जिले पीछे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की 25 अगस्त 2026 तक की जिला-वार समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को मिले कुल ₹125 करोड़ में से अब तक केवल ₹34.93 करोड़ (लगभग 28%) खर्च हुए हैं, जबकि ₹90.10 करोड़ की राशि बैंकों और कोषागारों में पड़ी है। राज्य के 24 में से 20 जिलों में खर्च शून्य प्रतिशत है। उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) नहीं मिलने से केंद्र से योजना की अगली किस्त मिलने में भी अड़चन आ रही है।

राज्य मुख्यालय ने ₹48.03 करोड़ में से ₹31.25 करोड़ (65%) और रांची जिले ने ₹7.50 करोड़ में से ₹3.06 करोड़ (41%) खर्च किये हैं। लोहरदगा में 20% (₹16.40 लाख), गुमला में 15% (₹29.87 लाख) और पूर्वी सिंहभूम में 3% (₹14.77 लाख) राशि खर्च हुई। वहीं बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, पलामू, पाकुड़, रामगढ़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में आवंटित कुल ₹61.65 करोड़ में से एक भी रुपया जारी नहीं किया गया। फंड का इस्तेमाल प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए उपकरण व दवाएं खरीदने तथा प्रयोगशालाओं में मुफ्त ब्लड टेस्ट और एक्स-रे जैसी सुविधाओं के लिए होना था। भुगतान नहीं होने से कई वेंडरों और अस्पतालों के बिल भी लंबित हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले में सभी जिलों के उपायुक्तों से प्रशासनिक हस्तक्षेप का आग्रह किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (झारखंड) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों को 15 दिनों के भीतर लंबित भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया है। तकनीकी कारणों से एजेंसियों के भुगतान नहीं कर पाने की स्थिति में सिविल सर्जन बतौर एकाउंट ऑफिसर नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करायेंगे।


