एआई-एमएल से बदलेगा खनिज खोज का तरीका, नये भंडार तलाशने में मिलेगी रफ्तार



रांची : झारखंड में खनिज अन्वेषण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। बुधवार को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित 30वीं झारखंड राज्य भूतात्विक कार्यक्रम पर्षद की बैठक में अरवा राजकमल ने कहा कि राज्य को कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण और उच्च मूल्य वाले खनिजों तथा पर्यावरण अनुकूल खनन पर ध्यान देना होगा। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के जरिये खनिज अन्वेषण, खनिज संभावनाओं की पहचान, माइन प्लानिंग और भू-वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण पर तकनीकी चर्चा हुई। अरवा राजकमल ने कहा कि कोयला उत्पादन हमेशा एक ही गति से नहीं बढ़ सकता, इसलिए राज्य को भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा अभी से तय करनी होगी।


राहुल सिन्हा ने अगले 10, 20 वर्ष और उससे आगे की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक नीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अन्वेषण और रिपोर्ट तैयार करने के दौरान ही वन क्षेत्र, भूमि, सीमांकन और पर्यावरण से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान होने से नीलामी और खनन लीज की प्रक्रिया आसान हो सकती है। उन्होंने लिथियम, यूरेनियम, टाइटेनियम और वैनेडियम जैसे क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के अन्वेषण पर जोर देते हुए कहा कि एआई से पुराने और नये भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का कम समय में विश्लेषण कर बेहतर रिपोर्ट तैयार करने और नये खनिज भंडार की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।
बैठक में बताया गया कि सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के बाद डीएमजी, झारखंड ने नीलामी के लिए 15 प्रमुख खनिज ब्लॉक तैयार किये हैं। इनमें रांची, रामगढ़, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न लाइमस्टोन, सोना, बेस मेटल, कॉपर, आयरन ओर और मैंगनीज ब्लॉक शामिल हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार का खान मंत्रालय पलामू और लोहरदगा के तीन क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक की नीलामी करेगा। तकनीकी सत्र में आईएसएम धनबाद, जीएसआई, निजी क्षेत्र और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने एआई-एमएल आधारित खनिज अन्वेषण और माइन प्लानिंग सहित विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी।


