भागवत ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन, आचार्य शैलेश कुमार त्रिपाठी ने व्यास पीठ से श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का रोचक वर्णन प्रस्तुत किया।
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जमशेदपुर : सोनारी आदर्श नगर फेज 11 में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन, आचार्य शैलेश कुमार त्रिपाठी ने व्यास पीठ के माध्यम से श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का रोचक वर्णन प्रस्तुत किया| शैलेश कुमार त्रिपाठी ने कहा की विदर्भ के राजा भीष्मक की रुपवती कन्या रुक्मिणी थी। उसके पांच भाइयों में एक का नाम रुक्मि था। भगवान कृष्ण की यश कीर्ति सुनकर
रुक्मिणी उनका पति रुप में वरण करना चाहती थी किंतु उसका भाई रुक्मि अपनी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल से करना चाहता था। यह जान कर रुक्मिणी ने ब्राह्मण के हाथ श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर कहा कि वह अंबिका भवानी के मंदिर में उनकी प्रतीक्षा करेगी।वहां आकर वह उसे स्वीकार कर ले चलें अन्यथा वह प्राण त्याग कर लेंगी।

