नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड निकला NIT जमशेदपुर का पूर्व छात्र, व्हाट्सएप नेटवर्क से भड़काया श्रमिक आंदोलन


जमशेदपुर : गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में 13 अप्रैल को हुई हिंसक घटनाओं की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जमशेदपुर स्थित National Institute of Technology Jamshedpur (NIT) का पूर्व बीटेक छात्र आदित्य आनंद मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है। पुलिस ने इस घटना को अचानक भड़की भीड़ का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश बताया है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र में अशांति फैलाना था।

नोएडा पुलिस आयुक्त Laxmi Singh ने बताया कि यह पूरा आंदोलन योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था। जांच में सामने आया है कि आदित्य आनंद अपने दो साथियों—रूपेश रॉय और मनीषा चौहान—के साथ मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में नोएडा पहुंचा था, जहां उन्होंने पहले से इलाके की रेकी (reconnaissance) की। इसके बाद उन्होंने डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर श्रमिकों को संगठित करना शुरू किया।
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए बड़ी संख्या में मजदूरों को जोड़ने के लिए QR कोड का इस्तेमाल किया। इन समूहों के माध्यम से हजारों मजदूरों को एकजुट किया गया और 10 अप्रैल तक इन लोगों ने उकसावे भरे भाषण और मार्च आयोजित कर श्रमिकों को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद अचानक कई इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो गए, जो कुछ स्थानों पर हिंसक रूप ले बैठे।
इस हिंसा के दौरान कई जगहों पर वाहनों में आगजनी, पथराव और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर के 83 स्थानों पर हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे, हालांकि अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन दो प्रमुख स्थानों पर हालात बेकाबू हो गए, जहां पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस आंदोलन को भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक जानकारी फैलाने का सहारा लिया गया। कुछ वायरल वीडियो और पोस्ट में यह दावा किया गया कि पुलिस फायरिंग में कई मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा पाया गया।
साइबर पुलिस ने दो सोशल मीडिया अकाउंट—@Proudindiannavi और @Mir_Ilyas_INC—की पहचान की, जो पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। पुलिस के अनुसार, इन अकाउंट्स ने VPN का इस्तेमाल कर गलत जानकारी फैलाते हुए लोगों में डर और गुस्सा पैदा करने की कोशिश की। इस संबंध में पुलिस ने आईटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
अब तक इस पूरे मामले में 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी आदित्य आनंद अभी फरार है। पुलिस ने उसके बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि गौतम बुद्ध नगर में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और सभी औद्योगिक इकाइयां फिर से सुचारू रूप से काम कर रही हैं। पुलिस और प्रशासन श्रमिकों के साथ संवाद बनाए हुए हैं और उनकी मांगों के समाधान की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


