शादी का प्रस्ताव और हाथ पकड़ना नहीं माना अपराध, हाईकोर्ट ने रद्द की सजा






रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल शादी का प्रस्ताव देना और हाथ पकड़ना, अगर उसमें कोई गलत आपराधिक मंशा साबित नहीं होती है, तो यह महिला की गरिमा भंग करने वाले अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। अदालत ने इस आधार पर आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।


मामला सरायकेला-खरसावां जिले का है, जहां एक व्यक्ति पर 10 वर्षीय बच्ची का हाथ पकड़कर शादी के लिए ले जाने का आरोप लगा था। निचली अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 354 के तहत दोषी ठहराया था, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस धारा के लिए आपराधिक मंशा का होना जरूरी है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार की पीठ ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया।


