बंगाल में मतदाता सूची का बड़ा संकट: 60 लाख से ज़्यादा नाम “समीक्षा के दायरे” में, मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज़्यादा असर

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले बड़ी समस्या सामने आ गई है। इस सूची में लगभग 60,06,675 मतदाताओं के नाम समीक्षा या विवाद की वजह से “निर्णय के अधीन” दिख रहे हैं। अगर इन्हें न्यायिक मंजूरी नहीं मिलती, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में मत नहीं दे पाएँगे।निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार शुरुआती समीक्षा में कई मतदाताओं के दस्तावेज़ों या जानकारियों में विसंगतियां पाई गई हैं। इसलिए उन नामों को वापस समीक्षा के लिए भेज दिया गया है, जिनमें पहले हरी झंडी (स्वीकृति) मिल चुकी थी।

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सबसे ज्यादा मामले मुस्लिम बहुल जिलों में सामने आ रहे हैं। मुर्शिदाबाद में लगभग 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख, दक्षिण और उत्तर 24 परगना में क्रमशः 5.22 लाख और 5 लाख नाम विवादित सूची में हैं। झारग्राम और कालिम्पोंग में भी हज़ारों मतदाता इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने सभी विवादित मामलों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों से कराने का निर्णय लिया है। इन न्यायिक अधिकारियों को पिछले कुछ हफ्तों से यह काम सौंपा गया है और वे तय करेंगे कि किन नामों को सूची में रखा जाए और किन्हें हटाया जाए।

अब 28 फरवरी को प्रकाशित होने वाली फाइनल मतदाता सूची में चुनाव आयोग 7.08 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल करेगा। लेकिन जिन मतदाताओं के नाम अब भी समीक्षा के दायरे में हैं, उनके आगे “निर्णय के अधीन” जैसा लेबल लिखा रहेगा और उन्हें न्यायिक मंज़ूरी मिलने तक वोट दर्ज कराने में समस्या हो सकती है।

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राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है। कुछ दलों ने आरोप लगाए हैं कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत बहुसंख्यक समुदाय वाले जिलों के मतदाताओं पर असामान्य असर पड़ा है और इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठते हैं।निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी स्थिति को ऑनलाइन वेबसाइट या संबंधित अधिकारियों से जांचें और अगर आवश्यक हो तो फॉर्म 6 के माध्यम से पुनः नामांकन की व्यवस्था का उपयोग करें।

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