दुर्घटना में आंखों की रोशनी गंवा चुके लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश चंद्रशेखरन को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित,

0
Advertisements
Advertisements

Saraikela : 2014 में एक घातक सैन्य दुर्घटना में लेफ्टिनेंट कर्नल द्वारकेश चंद्रशेखरन की आंखों की रोशनी चली गई थी, कई लोगों ने मान लिया कि उनका करियर अब खत्म हो गया है.
लेकिन सिर्फ आठ महीने के इलाज के बाद उन्होंने सहायक तकनीक के सहारे फिर से सक्रिय सेवा में वापसी की और पूरी तरह दृष्टिवान अधिकारियों के बराबर प्रदर्शन किया. वे भारत की सशस्त्र सेनाओं के पहले ऐसे अधिकारी बने जो पूरी तरह नेत्रहीन होकर भी ड्यूटी पर तैनात हैं.

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements

 रिकॉर्ड तोड़ पैरा एथलीट बन किया देश का नाम रोशन :

शिक्षाविद और समावेशन के प्रेरक चेहरा बन चुके द्वारकेश ने राष्ट्रीय तैराकी चैंपियन शिप में रिकॉर्ड बनाया. साथ ही भारत में ब्लाइंड शूटिंग की शुरुआत की और 16 हजार फीट ऊंचे सियाचिन ग्लेशियर तक ट्रेक भी किया. उनके इसी प्रदर्शन को लेकर हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. द्वारकेश कहते हैं भारत में नेत्रहीनों के लिए हर दरवाजा खुलना चाहिए. यह कहानी हिम्मत की है, जिद की है और जीत की है.

See also  नेशनल हाईवे पर भीषण हादसा, ड्राइवर गंभीर—यात्री भी घायल

Thanks for your Feedback!

You may have missed