झारखंड: बीजेपी को बड़ा झटका, ताला मरांडी ने पार्टी छोड़ी, थामा झामुमो का हाथ…

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लोक आलोक सेंट्रल डेस्क:झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बोरियो से पूर्व विधायक ताला मरांडी ने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का दामन थाम लिया। शुक्रवार को बरहेट में आयोजित सिदो-कान्हू जयंती समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।

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पहले भी रह चुके हैं झामुमो में, बाद में भाजपा में हुए थे शामिल

ताला मरांडी की राजनीतिक यात्रा झामुमो से ही शुरू हुई थी, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी बदलकर भाजपा का रुख किया। 2003 में वे भाजपा में शामिल हुए और 2005 के विधानसभा चुनाव में बोरियो से विधायक बने। उन्होंने झामुमो के वरिष्ठ नेता लोबिन हेम्ब्रम को हराया था। 2014 में भी वे भाजपा से विधायक चुने गए, लेकिन 2019 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने आजसू पार्टी से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

भाजपा में दोबारा वापसी, फिर भी नहीं मिला सम्मान

हार के बाद उन्होंने दोबारा भाजपा की सदस्यता ली। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने राजमहल सीट से उम्मीदवार बनाया, मगर वे रिकॉर्ड मतों से हार गए। इसके बाद वे विधानसभा चुनाव में बोरियो से टिकट की मांग कर रहे थे, परंतु पार्टी ने एक बार फिर लोबिन हेम्ब्रम को प्रत्याशी बनाया, जिससे वे नाराज़ हो गए।

बेटे पहले ही हो चुके हैं झामुमो में शामिल

ताला मरांडी के झामुमो में शामिल होने से पहले उनके दोनों बेटे विधानसभा चुनाव के दौरान ही झामुमो की सदस्यता ग्रहण कर चुके थे। अब खुद मरांडी के पार्टी में आने से सियासी संकेत और स्पष्ट हो गए हैं।

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प्रतिमा पांडेय भी शामिल हुईं झामुमो में

इसी मौके पर पाकुड़ की छोटी राजबाड़ी की प्रतिमा पांडेय ने भी झामुमो की सदस्यता ली। इन दोनों को पार्टी में शामिल कराने में झामुमो केंद्रीय समिति के सदस्य पंकज मिश्रा की बड़ी भूमिका रही।

राजनीतिक विश्लेषण

ताला मरांडी का झामुमो में वापस आना भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब वे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अब देखना यह है कि झामुमो उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में किस भूमिका में लाता है।

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