एनआईटी जमशेदपुर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन SPMCE 2026 का शुभारंभ, ‘एसजी लैब’ का उद्घाटन और 40 वर्षों की शैक्षणिक विरासत का सम्मान



Saraikela (संजीव मेहता) : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय एएनआरएफ समर्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज एंड मैटेरियल्स इन सिविल इंजीनियरिंग (SPMCE 2026)” का शुभारंभ हुआ. हाइब्रिड मोड में आयोजित यह सम्मेलन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए टिकाऊ, शून्य-अपशिष्ट एवं सुदृढ़ अवसंरचना विकास जैसे वैश्विक विषयों पर केंद्रित है. उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रसिद्ध गायिका निबेदिता मंडल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई. सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. सुभदीप मेत्या ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि सम्मेलन के प्रथम संस्करण को वैश्विक स्तर पर अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई. कठोर डबल-ब्लाइंड पीयर रिव्यू प्रक्रिया एवं 37 प्रतिशत चयन दर के पश्चात 232 उच्च गुणवत्ता वाले शोधपत्रों का चयन किया गया, जिन्हें 21 समानांतर तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा. विभागाध्यक्ष डॉ. प्रह्लाद प्रसाद ने एनआईटी जमशेदपुर में संचालित उन्नत अनुसंधान गतिविधियों, परीक्षण सुविधाओं एवं विभागीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सम्मेलन स्मारिका का भी लोकार्पण किया गया. मंच पर शिक्षा एवं उद्योग जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित थीं. मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक (महानिदेशक, सरला बिरला विश्वविद्यालय) ने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों में पर्यावरण-अनुकूल बाइंडर्स एवं स्मार्ट मैटेरियल्स के उपयोग पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक एवं सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में उच्च प्रभाव वाले इंजीनियरिंग अनुसंधान को जमीनी औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया. विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कुमार भटनागर (प्रबंध निदेशक, टाटा स्टील UISL) तथा श्री प्रभाकर सिंह (संस्थापक एवं कुलाधिपति, सोना देवी विश्वविद्यालय) ने शहरी अवसंरचना विकास एवं दूरदर्शी नेतृत्व के महत्व पर अपने विचार साझा किए.
सम्मेलन के प्रथम दिवस पर विभाग की दो ऐतिहासिक उपलब्धियों का साक्षी बना — नवस्थापित “सस्टेनेबल जियोटेक्निक्स प्रयोगशाला (SG Lab)” का उद्घाटन तथा एक भावपूर्ण “लीगेसी ट्रिब्यूट सेशन” का आयोजन. इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों प्रो. आर. पी. सिंह एवं प्रो. ए. के. एल. श्रीवास्तव के चार दशकों के उल्लेखनीय शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण किया गया. दोपहर के सत्रों में प्रो. अनिमेष दास (आईआईटी कानपुर), प्रो. सुब्रत चक्रवर्ती (आईआईईएसटी शिबपुर) एवं प्रो. दीपक जाधव (कोरिया मैरीटाइम एंड ओशन यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया) द्वारा वैश्विक स्तर के मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किए गए. दिन का समापन रेडिसन होटल, जमशेदपुर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या एवं नेटवर्किंग डिनर के साथ हुआ.



