जमशेदपुर में हुलास और पेंशनर समाज का भव्य काव्य-मंच, योग, फादर्स डे और भ्रष्टाचार पर गूंजी कविताएं

Advertisements
Advertisements
Advertisements

जमशेदपुर : जेठ की तपती दुपहरी में सावन की फुहार का स्वागत करने के उद्देश्य से “हुलास” एवं जमशेदपुर पेंशनर समाज के संयुक्त सौजन्य से रविवार, 21 जून 2026 को पेंशनर समाज कार्यालय (पुराना कोर्ट परिसर, साकची) में एक भव्य काव्य-मंच का आयोजन किया गया।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

कार्यक्रम की अध्यक्षता हुलास परिवार के अध्यक्ष श्री श्यामल सुमन ने की। जमशेदपुर के प्रख्यात गीतकार बसन्त जमशेदपुरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मंच पर जमशेदपुर पेंशनर समाज के अध्यक्ष एवं सचिव एस. पी. सिंह भी विराजमान थे। कार्यक्रम का सफल संचालन नवीन अग्रवाल ने किया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी अतिथियों एवं कवियों ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। तत्पश्चात श्री दीपक वर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से काव्य-संध्या का शुभारम्भ हुआ।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एवं फादर्स डे के अवसर पर उपस्थित कवियों ने विविध विषयों पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्यामल सुमन ने कहा—

“आसन-कसरत दें हमें जीने में सहयोग,
आतम-परमातम मिले तभी योग है योग।”

वरिष्ठ कवि विनोद ‘बेगाना’ ने योग के महत्व को रेखांकित करते हुए पढ़ा—

“तन-मन दोनों ही रहे, इससे सदा निरोग,
यह नुस्खा है कारगर, चलो करें हम योग।”

प्रसिद्ध व्यंग्यकार दीपक वर्मा ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा—

“दोनों हाथ जोड़कर, सांस खींच-छोड़ कर,
नित्य प्रति आप रोज योग अपनाइये।”

घाटशिला से पधारी स्वर-कोकिला रजनी जी की पंक्तियाँ—

“योग निरोग करे जीवन को”

श्रोताओं द्वारा खूब सराही गईं।

कार्यक्रम के संचालक नवीन अग्रवाल ने भ्रष्टाचार पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा—

See also  गोलमुरी क्लब यूनियन में फिर राकेश्वर पांडेय की वापसी, ददन सिंह बने महासचिव

“कोई घोटाला नहीं हुआ,
मंत्री, अफसर, पुलिस, इंजीनियर सबने गवाही दे दी।
पुल बेचारा क्या करता,
गिरकर गवाही दे दी।”

इसी क्रम में हुलास संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री हरि किशन चावला ने भी भ्रष्टाचार पर आधारित अपनी प्रभावशाली रचना सुनाई। वहीं कवि धनपत्त की ओजस्वी पंक्तियों—

“घूस को मारो घूँसा और घूसखोरों को लात,
कवि धनपत्त कहत है, चिंता करने से न बनिये बात।”

ने श्रोताओं के बीच विशेष उत्साह का संचार किया तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखर जन-जागरण का संदेश दिया।

जय प्रकाश पाण्डेय की मार्मिक पंक्तियाँ—

“इक जमाने से एक सफर में हैं…”

श्रोताओं द्वारा खूब सराही गईं। मुख्य अतिथि बसन्त जमशेदपुरी ने हास्य-व्यंग्य की शानदार प्रस्तुति देकर समाँ बाँध दिया। कवयित्री द्वय सुनीता बेदी एवं बीना कुमारी की काव्य प्रस्तुतियों को भी श्रोताओं ने भरपूर सराहा।

कार्यक्रम के अंत में जमशेदपुर पेंशनर समाज के सचिव एस. पी. सिंह ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

काव्य-मंच सौहार्द, साहित्य, सामाजिक सरोकार और सृजनशील अभिव्यक्ति का सुंदर संगम बनकर उपस्थित जनसमुदाय के मन में अपनी अमिट छाप छोड़ गया।

About The Author

You may have missed