जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी पर हाईकोर्ट सख्त, खुद लिया बड़ा फैसला… मौत के बाद खुली व्यवस्था की पोल

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रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज कर ली है। अदालत ने यह कदम उस मामले की सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें एक बंदी को बेहतर इलाज न मिलने पर उसकी मौत हो गई थी। कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए सरकार से जवाब भी मांगा है।

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सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य की जेलों में डॉक्टरों के 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 1 पद पर ही डॉक्टर कार्यरत है, जबकि 42 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई। राज्य में रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह समेत कुल 6 केंद्रीय जेल, 16 जिला जेल और 6 उप-जेल संचालित हैं।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ के पास भेज दिया है। साथ ही मृत बंदी के परिजनों को सरकार से मुआवजा मांगने की अनुमति भी दी गई है। अदालत ने संकेत दिया कि जेलों में स्वास्थ्य व्यवस्था की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और तत्काल सुधार की आवश्यकता है.

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