20 से 25 वर्षों की सेवा के बाद आर्थिक सहायता और पेंशन की मांग, सरकार को सौंपा मांग पत्र

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झारखंड : झारखंड राज्य सहयोगी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सह झारखंड राज्य सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा के राज्य सदस्य विनोद तिवारी ने सेवानिवृत्त सहायक अध्यापकों को आर्थिक सहायता और मासिक पेंशन देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक और शिक्षा सचिव को इस संबंध में मांग पत्र सौंपा है। मांग पत्र में कहा गया है कि सहायक अध्यापकों ने 20 से 25 वर्षों तक विद्यालयों में सेवा दी, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सरकार की ओर से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। संघ ने हाईकोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें 15 वर्ष से अधिक सेवा करने वाले अस्थायी कर्मियों को पेंशन संबंधी लाभ दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

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संघ के अनुसार, पूर्व में झारखंड शिक्षा परियोजना के खाते में पारा शिक्षकों के लिए 10 करोड़ रुपए दिए गए थे और इस राशि से मिलने वाले ब्याज का इस्तेमाल सेवानिवृत्त होने वाले अथवा मृत पारा शिक्षकों के परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाना था। इस मुद्दे पर परियोजना निदेशक और विभागीय अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक भी हुई थी। 27 सितंबर 2023 को प्रशासनिक पदाधिकारी जयंत कुमार मिश्रा की ओर से पत्र जारी कर जिलों से 3 मार्च 2020 से 29 सितंबर 2023 तक सेवानिवृत्त और मृत पारा शिक्षकों की सूची मांगी गई थी। संघ का कहना है कि आगे मिलने वाले ब्याज से भी इसी तरह सहायता देने का निर्णय हुआ था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

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विनोद तिवारी ने आर्थिक सहायता के लिए संघ की सदस्यता और 200 रुपए मासिक सदस्यता शुल्क की संभावित शर्त पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पहले से सेवानिवृत्त और आर्थिक रूप से परेशान सहायक अध्यापकों के लिए यह व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने सरकार से हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सेवानिवृत्त सहायक अध्यापकों के लिए आर्थिक सहायता की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के साथ मासिक पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की है।

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