परिसीमन पर आदिवासी महाजुटान में चिंता, संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष का ऐलान

रांची : प्रस्तावित परिसीमन और आदिवासी समाज से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर रविवार को मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान आयोजित हुआ। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में झारखंड के अलग-अलग जिलों से महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे पहुंचे। आयोजकों ने महाजुटान में लाखों लोगों के शामिल होने का दावा किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। उनकी ओर से झामुमो विधायक विकास कुमार मुंडा ने प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।


महाजुटान में सबसे अधिक चर्चा प्रस्तावित परिसीमन पर हुई। आदिवासी नेताओं ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में केवल आबादी के आधार पर परिसीमन किया गया तो झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वक्ताओं ने कहा कि राज्य की स्थिति दूसरे प्रदेशों से अलग है, इसलिए परिसीमन तय करते समय जनसंख्या के आंकड़ों के साथ ऐतिहासिक विस्थापन, आदिवासी बहुल क्षेत्र और संविधान में दिए गए विशेष प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में CNT-SPT Act, MMDR संशोधन बिल, पांचवीं अनुसूची, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे संवैधानिक एवं कानूनी मुद्दे भी उठाए गए। वक्ताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों और हिस्सेदारी से जुड़े मामलों पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए नेताओं ने आदिवासी हितों और अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया तथा कहा कि संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।


