चिन्मया विद्यालय के विद्यार्थियों ने सिक्का संग्रहालय में जाना मुद्राओं का इतिहास, प्राचीन से आधुनिक काल तक की मिली जानकारी

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जमशेदपुर : शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवहारिक और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में Chinmaya Vidyalaya Jamshedpur के विद्यार्थियों ने एक अनूठी शैक्षणिक यात्रा की। शुक्रवार को विद्यालय के साउथ पार्क परिसर के कक्षा सातवीं के छात्र-छात्राओं ने जमशेदपुर स्थित प्रसिद्ध सिक्का संग्रहालय का भ्रमण किया, जहां उन्होंने भारतीय और विश्व इतिहास से जुड़ी मुद्राओं के विकास को करीब से समझा।इस शैक्षणिक भ्रमण में छात्र अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में संग्रहालय पहुंचे, जहां उन्हें प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक के सिक्कों की विस्तृत जानकारी दी गई। संग्रहालय में प्रदर्शित विभिन्न कालखंडों के सिक्कों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि समय के साथ मुद्रा प्रणाली किस प्रकार विकसित हुई और समाज, व्यापार तथा शासन व्यवस्था में इसकी क्या भूमिका रही है।

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इस अवसर पर सिक्का संग्राहक क्लब के महासचिव प्रेम पुएस कुमार ने विद्यार्थियों को विशेष व्याख्यान देते हुए ‘मुद्राशास्त्र’ (Numismatics) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से लेकर पंच-मार्क्ड सिक्कों तक, प्रत्येक युग की मुद्रा उस समय की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। उन्होंने सिक्कों के निर्माण, उनके वजन, धातु और मापन प्रणाली के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। भ्रमण के दौरान छात्रों ने केवल सिक्कों को देखा ही नहीं, बल्कि एक कार्यशाला में भाग लेकर उनसे संबंधित नोट्स भी तैयार किए। इस इंटरैक्टिव लर्निंग प्रक्रिया ने विद्यार्थियों के अंदर इतिहास के प्रति जिज्ञासा और समझ को और गहरा किया।

प्रदर्शनी में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र प्राचीन मापन प्रणाली से जुड़े ‘गुंजा बीज’ (रत्ती) और सरसों के दाने रहे, जिनका उपयोग पुराने समय में सिक्कों के वजन को मापने के लिए किया जाता था। इन पारंपरिक तरीकों को देखकर विद्यार्थियों को यह अहसास हुआ कि आधुनिक तकनीक से पहले भी लोग कितनी सटीकता से व्यापारिक प्रणाली संचालित करते थे। गौरतलब है कि जमशेदपुर का यह सिक्का संग्रहालय ‘कॉइन कलेक्टर्स क्लब’ द्वारा संचालित किया जाता है और इसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक काल तक के दुर्लभ सिक्कों का संग्रह मौजूद है। यह संग्रहालय नई पीढ़ी को इतिहास, संस्कृति और आर्थिक विकास की यात्रा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

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शिक्षकों ने इस भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान, शोध की रुचि और इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। वहीं छात्रों ने भी इस अनुभव को रोमांचक और ज्ञानवर्धक बताया। इस प्रकार यह भ्रमण केवल एक सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत कक्षा साबित हुआ, जहां उन्होंने इतिहास को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक रूप में देखा और समझा।

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