फर्जी जाति प्रमाण पत्र से पंचायत चुनाव जीतने का आरोप, बिरसा सेना ने डीसी से की सख्त कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर : जिले में पंचायत व्यवस्था और आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बिरसा सेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त (डीसी) से मुलाकात कर पलाशबानी पंचायत के वर्तमान पंचायत समिति सदस्य भरत राम लोहरा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीतकर पद हासिल किया है।

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प्रतिनिधिमंडल ने डीसी को दिए ज्ञापन में बताया कि भरत राम लोहरा इस क्षेत्र के मूल खतियानधारी नहीं हैं। उनके परिवार को केवल सरकारी भूमि की बंदोबस्ती दी गई थी, जिसके आधार पर अंचल अधिकारी द्वारा उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जबकि झारखंड सरकार के नियमों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति का लाभ लेने के लिए 1950 से पूर्व का स्थायी निवास या 1964 के खतियान का होना अनिवार्य है।

जांच में यह भी सामने आया है कि भरत राम लोहरा के दादा बुद्धदेव लोहरा उर्फ बुधू कमार पश्चिम सिंहभूम के पिल्का गांव के निवासी थे और उनका खतियान ‘कमार’ जाति (EBC-1) के रूप में दर्ज है, जो ST श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में यह पूरा मामला आरक्षण नियमों के उल्लंघन का प्रतीक माना जा रहा है।

बिरसा सेना ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति क्षेत्र में अवैध गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है, जिससे सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संगठन ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से जाति प्रमाण पत्र की जांच कर उसे रद्द किया जाए, संबंधित पद से हटाया जाए और दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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यह मामला न केवल पंचायत चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करता है।

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