माहली समुदाय की भाषा-संस्कृति पर 6 राज्यों में शोध की पहल, केंद्र ने TRI को भेजा पत्र

जमशेदपुर : माहली अनुसूचित जनजाति समुदाय की भाषा, संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर व्यवस्थित शोध और दस्तावेजीकरण की दिशा में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने पहल की है। मंत्रालय ने झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और छत्तीसगढ़ के ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) के निदेशकों को पत्र भेजकर माहली समुदाय पर शोध शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा है। पूर्व विधायक सह ऑल इंडिया माहली आदिवासी एसोसिएशन के अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा की मांग पर मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। भारत सरकार के अवर सचिव पी. हाओकिप ने 14 सितंबर को जारी पत्र में ‘सपोर्ट टू TRI’ योजना के तहत शोध प्रस्ताव तैयार कर वार्षिक कार्य योजना में शामिल करने के लिए विचारार्थ भेजने का अनुरोध किया है।

प्रस्तावित अध्ययन में माहली समुदाय के ऐतिहासिक और नृवंशविज्ञान प्रोफाइल के साथ भाषा की विशेषताओं, शब्दावली और मौखिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। समुदाय की सांस्कृतिक प्रथाओं, पारंपरिक कला और शिल्प तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी अध्ययन होगा। शोध के तहत माहली भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए सिफारिशें तैयार करने की भी बात कही गई है।
रविवार को बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में सूर्य सिंह बेसरा की अध्यक्षता में ऑल इंडिया माहली एसोसिएशन की बैठक भी हुई। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा के साथ 11 नवंबर को असम के तिनसुकिया जिले में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय माहली आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। सूर्यसिंह बेसरा ने कहा कि इस अवसर पर देशभर के माहली समाज के लोगों का महाजुटान होगा। बैठक में महासचिव-इंटर माहली, रमेश माहली, मनोरंजन माहली, रामचंद्र बेसरा, रामलाल माहली, ईश्वर हेंब्रम, प्रकाश हेंब्रम, कारू माहली, कान्हू राम मार्डी समेत अन्य लोग मौजूद थे।


